पटना। बिहार के उत्तर क्षेत्र में औद्योगिक विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए एक पहल की गई है। राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों के तहत अब सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर जिलों में अत्याधुनिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स (खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां) स्थापित की जाने वाली हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी फूड फैक्ट्रियां
इन दोनों जिलों में स्थापित होने वाली इन आधुनिक फूड फैक्ट्रियों में विभिन्न प्रकार के लोकप्रिय खाद्य पदार्थों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से मिठाई, नमकीन, बेकरी उत्पाद, बिस्कुट और अन्य रेडी-टू-ईट व पैकेज्ड खाद्य सामग्री शामिल होगी। इन उत्पादों की विशेषता यह होगी कि इनमें सामान्य खाद्य पदार्थों के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष हेल्थ-कॉन्शियस उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। इसके तहत विशेष रूप से डायबिटीज (मधुमेह) और मोटापे से पीड़ित लोगों की सेहत का ख्याल रखते हुए खाद्य विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस पूरी परियोजना पर कुल 37 करोड़ रुपए की लागत आएगी। फैक्ट्रियों का ढांचा और डिजाइन पूरी तरह से वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। कारखानों के भीतर सामग्री की मिक्सिंग, शेपिंग, बेकिंग और पैकेजिंग जैसी अधिकांश महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी तरह से स्वचालित मशीनों के माध्यम से संचालित होंगी। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए सभी कारखानों में FSSAI, ISO और HACCP के सभी निर्धारित नियमों और मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।
रोजगार के सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
इस परियोजना से रोजगार के मोर्चे पर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इन फैक्ट्रियों के शुरू होने से प्रत्यक्ष तौर पर लगभग 450 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, अप्रत्यक्ष रूप से करीब 8,000 लोगों को आजीविका के साधन प्राप्त होंगे। इस अप्रत्यक्ष लाभ के दायरे में पैकेजिंग सामग्री उपलब्ध कराने वाले सप्लायर, ट्रांसपोर्टर, डिलीवरी वेंडर, छोटे डिस्ट्रीब्यूटर, साथ ही थोक और खुदरा व्यापारी शामिल होंगे, जिससे स्थानीय व्यापार में तेजी आएगी।
कृषि और डेयरी सेक्टर को मिलेगा सीधा लाभ
इस औद्योगिक पहल से क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों को अत्यधिक लाभ पहुंचेगा:
डेयरी किसानों के लिए नया बाजार: मिठाई, बेकरी और बिस्कुट के निर्माण में दूध, खोया, मक्खन और घी की खपत भारी मात्रा में बढ़ेगी। इससे सुधा डेयरी, अन्य सहकारी डेयरियों, निजी दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों को अपने उत्पादों के लिए एक बड़ा और स्थिर बाजार मिलेगा।
फ्लोर मिलों को नियमित ऑर्डर: बिस्कुट और नमकीन के उत्पादन में आटा, सूजी, मैदा और बेसन की निरंतर आवश्यकता होती है। इससे उत्तर बिहार की स्थानीय फ्लोर मिलों को नियमित ऑर्डर मिलेंगे और उनकी उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
किसानों के लिए खेती के नए विकल्प: पारंपरिक रूप से धान और गेहूं की खेती करने वाले किसान अब अपनी आय बढ़ाने के लिए मोटे अनाज, सरसों, मूंगफली, चना, उड़द और विभिन्न मसालों की व्यावसायिक खेती की ओर रुख कर सकेंगे।
बिहार के हर जिले में हो रहा है औद्योगिक विकास
उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार के अनुसार, बिहार सरकार राज्य के प्रत्येक जिले में सुनियोजित तरीके से औद्योगिक क्षेत्रों का विकास कर रही है। आने वाले समय में अलग-अलग जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादन के साथ-साथ प्रसिद्ध ब्रांडेड सामग्री का निर्माण भी किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के टिकाऊ साधन उपलब्ध होंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और इसके साथ ही सड़क, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों के विकास को भी तीव्र गति मिलेगी।

