हिसार। चानौत गांव में पेयजल संकट को लेकर पिछले 38 दिनों से चल रहे धरने के बीच सोमवार देर रात हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। करीब डेढ़ बजे प्रशासन और पुलिस की टीम गांव में भाखड़ा पेयजल लाइन से किए गए टी-कनेक्शन को हटाने पहुंची, जिसके बाद ग्रामीणों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
जानकारी के अनुसार, पुलिस और जनस्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में किए गए कथित अवैध टी-कनेक्शन को उखाड़ने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान धरनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने विरोध जताया। आंसू गैस छोड़े जाने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ लोगों द्वारा पुलिस पर पथराव किए जाने की भी सूचना है।
आंसू गैस के असर से बिगड़ी डीसी की तबीयत
घटनास्थल पर मौजूद हिसार डीसी राहुल नरवाल भी आंसू गैस के प्रभाव की चपेट में आ गए, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। अधिकारियों ने उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। देर रात तक प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
रातभर पुलिस कार्रवाई की आशंका में जुटे ग्रामीण
धरना स्थल पर सोमवार सुबह से माहौल सामान्य था, लेकिन रात करीब 10 बजे धरना समिति के सदस्यों को सूचना मिली कि प्रशासन किसी भी समय कार्रवाई कर सकता है। इसके बाद पूरे गांव में सूचना फैल गई और बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे धरनास्थल पर पहुंच गए।
धरना समिति के सदस्य लगातार लोगों से शांति बनाए रखने और किसी प्रकार के टकराव से बचने की अपील करते रहे। इसके बावजूद जैसे ही पुलिस और प्रशासनिक अमला गांव पहुंचा, माहौल तनावपूर्ण हो गया।
सुबह से बन रही थी कार्रवाई की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, अवैध टी-कनेक्शन हटाने को लेकर प्रशासन और पुलिस दिनभर रणनीति बनाते रहे। इसके लिए अधिकारियों की बैठक रेस्ट हाउस में हुई। देर रात हांसी एसपी, डीसी राहुल नरवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी पुलिस बल के साथ चानौत गांव पहुंचे। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जेसीबी और क्रेन के साथ मौके पर मौजूद थे।
धरना समिति का दावा- गिरफ्तारी देंगे, कनेक्शन नहीं हटने देंगे
धरना समिति के सदस्य अनूप चानौत और पूर्व सरपंच सत्यवान ने कहा कि ग्रामीण किसी भी हालत में टी-कनेक्शन नहीं हटाने देंगे। उन्होंने कहा कि गांव के लोग गिरफ्तारी देने के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी पानी की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।
17 जून को भी हुआ था विवाद
गौरतलब है कि इससे पहले 17 जून की रात प्रशासन ने स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर अनशन पर बैठे लोगों को हटाने का प्रयास किया था, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा था। इसके अगले दिन ग्रामीणों ने ट्रैक्टर मार्च निकालकर जिला सचिवालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था।
फिलहाल गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। पानी के मुद्दे पर शुरू हुआ आंदोलन अब प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बड़े टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

