दिल्ली सरकार राजधानी की सड़कों पर लगी पुरानी स्ट्रीट लाइटों को हटाकर नई और आधुनिक स्मार्ट स्ट्रीट लाइट सिस्टम लगाने की योजना बना रही है। इसके तहत पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर लगी करीब 1 लाख स्ट्रीट लाइट्स को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। नई व्यवस्था में विशेष प्रकार की आधुनिक लाइट्स लगाने की योजना है, जिनमें संगीतमय और रोशनी आधारित (interactive lighting) तकनीक जैसी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं, ताकि सड़कें अधिक सुरक्षित और आकर्षक बन सकें।
इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार पहली बार मंथली इंस्टॉलमेंट मॉडल अपनाने जा रही है। इसके तहत लाइट्स लगाने और उनका रखरखाव करने वाली एजेंसी को हर महीने भुगतान किया जाएगा, जिससे सिस्टम का नियमित रखरखाव सुनिश्चित हो सके।योजना के अनुसार, यदि किसी जगह कोई स्ट्रीट लाइट खराब होती है, तो उसे 48 घंटे के भीतर बदलना या ठीक करना अनिवार्य होगा। इससे सड़क प्रकाश व्यवस्था अधिक विश्वसनीय और व्यवस्थित बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके तहत पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर लगी पुरानी लाइटों को हटाकर आधुनिक सिस्टम लगाया जाएगा। कैबिनेट मंत्री Parvesh Sahib Singh के अनुसार, अब तक देश में सरकारी प्रोजेक्ट्स का भुगतान आमतौर पर ओपन टेंडर, BOT (Build-Operate-Transfer), EPC (Engineering, Procurement & Construction) या Hybrid Annuity Model के तहत किया जाता रहा है। लेकिन दिल्ली सरकार पहली बार एक नया EMI मॉडल अपनाने की तैयारी कर रही है। इस नए मॉडल के तहत दिल्ली की करीब 1400 किलोमीटर लंबी सड़कों पर लगी लगभग एक लाख स्ट्रीट लाइट्स को बदला जाएगा। पूरा प्रोजेक्ट एक ही एजेंसी को दिया जाएगा, जिसे काम पूरा होने के बाद सरकार किस्तों में भुगतान करेगी। जानकारी के मुताबिक, इस भुगतान को लगभग 60 किस्तों (EMI) में बांटा जाएगा। इससे सरकार पर एकमुश्त वित्तीय बोझ कम होगा और प्रोजेक्ट को लंबे समय तक मेंटेनेंस के साथ चलाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
जिस एजेंसी को ठेका मिलेगा, वही 5 साल तक स्ट्रीट लाइट्स का मेंटेनेंस भी करेगी ,खराब या बंद लाइट को 48 घंटे के भीतर बदलना अनिवार्य होगा ,तय समय में लाइट नहीं बदलने पर प्रति लाइट, प्रति दिन ₹2000 का जुर्माना लगाया जाएगा लापरवाही पर एजेंसी को आर्थिक दंड देना होगा सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से शहर में स्ट्रीट लाइट सिस्टम अधिक भरोसेमंद और लगातार चालू रहने वाला बनेगा।
रात ढलने के साथ खुद कम होगी रोशनी
पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर नई तकनीक वाली स्मार्ट लाइट्स लगाई जाएंगी, जिनकी रोशनी और नियंत्रण पूरी तरह ऑटोमैटिक सिस्टम पर आधारित होगा। कैबिनेट मंत्री के अनुसार, नई स्ट्रीट लाइट्स की रोशनी 40 लक्स तक होगी, जबकि मौजूदा लाइट्स केवल 10 से 15 लक्स तक ही प्रकाश देती हैं। उनका कहना है कि वर्तमान लाइटें ऊंचाई पर लगी होने के कारण सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं दे पातीं। नई प्रणाली की खास बात यह होगी कि इसमें डायनामिक डिमिंग तकनीक होगी। जैसे-जैसे रात में प्राकृतिक रोशनी बढ़ेगी, स्ट्रीट लाइट्स की चमक अपने आप कम होती जाएगी शुरुआत में: 40 लक्स धीरे-धीरे: 30 लक्स फिर: 20 और 15 लक्स सुबह होने पर: लाइट्स अपने आप बंद इस तकनीक का उद्देश्य ऊर्जा की बचत और जरूरत के अनुसार रोशनी सुनिश्चित करना है।
प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब ₹450 करोड़ बताई गई है। सरकार का दावा है कि आधुनिक लाइट सिस्टम से अगले पांच वर्षों में लगभग ₹300 करोड़ की बिजली बचत हो सकती है, जिससे खर्च का बड़ा हिस्सा संतुलित हो जाएगा। इसके अलावा, सिस्टम की निगरानी के लिए संबंधित एजेंसी को एक कंट्रोल रूम स्थापित करना अनिवार्य होगा, जिससे लाइट्स की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और खराबी की तुरंत पहचान की जा सके।
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