कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। जिस बेटे को परिवार ने बेहतर भविष्य और सपनों की उड़ान के लिए कनाडा भेजा था, अब वही बेटा ताबूत में अपने गांव लौट रहा है। कुरुक्षेत्र जिले के गांव गजलाना निवासी 22 वर्षीय वीरेन रंगा का शव रविवार को कनाडा से उसके पैतृक गांव पहुंचेगा। गांव में अंतिम दर्शन के बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बेटे की असमय मौत से परिवार ही नहीं, पूरा गांव सदमे में है। सुबह से ही रिश्तेदार, परिचित और ग्रामीण वीरेन के घर पहुंचकर शोक व्यक्त कर रहे हैं।

परिजनों के अनुसार, वीरेन की मौत करीब 18 दिन पहले कनाडा में उस समय हुई, जब वह रोज की तरह रात को अपने कमरे में सोने गया था। अगले दिन काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं आने पर उसके साथ रहने वाले चचेरे भाइयों ने दरवाजा खटखटाया और जगाने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बाद में पता चला कि वीरेन की मौत हो चुकी है। अचानक आई इस खबर ने परिवार को अंदर तक तोड़ दिया।
वीरेन करीब दो साल पहले स्टडी वीजा पर कनाडा गया था। उसने वहां इलेक्ट्रिकल डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी कर ली थी और हाल ही में वर्क परमिट के लिए आवेदन किया था। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह करियर की नई शुरुआत करेगा और घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाएगा। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था।
परिवार ने बताया कि 14 मई को वीरेन की घर पर वीडियो कॉल के जरिए बात हुई थी। उस दौरान उसके पिता राजेंद्र रंगा और बड़ा भाई आदित्य भी मौजूद थे। बातचीत में वीरेन बिल्कुल सामान्य लग रहा था और उसने किसी परेशानी का कोई जिक्र नहीं किया था। कॉल खत्म होने के बाद वह सोने चला गया। अगले दिन उसकी तबीयत बिगड़ने और फिर मौत की खबर ने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी।
वीरेन ने शाहाबाद के खरींडवा स्थित आईटीआई (ITI – Industrial Training Institute) से इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में दो साल का डिप्लोमा किया था। उसके पिता राजेंद्र रंगा बिजली निगम में फोरमैन हैं, जबकि बड़ा भाई आदित्य हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से वेटरनरी सर्जन का कोर्स करने के बाद इंटर्नशिप कर रहा है। मां सुनीता गृहिणी हैं। फिलहाल वीरेन की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। कनाडा पुलिस मामले की जांच कर रही है और ब्लड सैंपल भी लिए गए हैं।
अब शव गांव पहुंच रहा
पिछले कई दिनों से परिवार, रिश्तेदार और दोस्त वीरेन का शव भारत लाने के प्रयास में जुटे थे। विदेश में जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब शव गांव पहुंच रहा है। दोस्तों ने भी सहायता राशि जुटाने के लिए ग्रुप बनाकर परिवार का साथ दिया। गांव में अंतिम विदाई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन हर आंख में सिर्फ एक सवाल है—जिस बेटे ने सपनों के साथ विदेश की उड़ान भरी थी, वह इतनी जल्दी खामोश होकर क्यों लौट आया?

