चंडीगढ़। पंजाब के स्थायी डीजीपी पद की दौड़ में शामिल आईपीएस अधिकारी एसएस चौहान का नाम सीबीआई की भ्रष्टाचार संबंधी एफआईआर में सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, एफआईआर में चौहान को आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि आरोपी रीडर ओपी राणा उनके नाम पर रिश्वत की मांग कर रहा था।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई आने वाले दिनों में एसएस चौहान से पूछताछ कर सकती है। हाल ही में पंजाब सरकार द्वारा यूपीएससी को भेजे गए डीजीपी पैनल में चौहान को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। ऐसे में इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीरता बढ़ा दी है।


एफआईआर में पंजाब विजिलेंस प्रमुख एसएस चौहान का नाम शिकायत और सत्यापन रिपोर्ट में दर्ज होने के कारण मामला और भी चर्चा में है, भले ही उन्हें आरोपी न बनाया गया हो। वहीं, रिश्वत मामले में फरार इंस्पेक्टर ओपी राणा पर सीबीआई का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। एजेंसी ने उसके विदेश भागने की आशंका के चलते रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत कई जगहों पर उसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है।


सीबीआई के अनुसार, मामला एक लंबित शिकायत को बंद कराने के बदले 13 लाख रुपये की रिश्वत मांगने से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच के बाद एजेंसी ने 11 मई को चंडीगढ़ के एक होटल में ट्रैप लगाया। इस दौरान अंकित वधावा नामक व्यक्ति को 13 लाख रुपये और एक मोबाइल फोन लेते हुए गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम रीडर ओपी राणा और अन्य लोगों तक पहुंचाई जानी थी। कार्रवाई के दौरान राणा मौके से फरार हो गया।


एफआईआर में ओपी राणा के अलावा निजी ठेकेदार राघव गोयल, उसके पिता विकास गोयल उर्फ विक्की गोयल और कुछ अज्ञात सरकारी व निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। सीबीआई के मुताबिक, ट्रैप कार्रवाई के बाद राघव गोयल, विकास गोयल और दो गनमैन को अंबाला के पास पंजाब-हरियाणा सीमा से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि ओपी राणा अब भी फरार है।