समय बड़ा मूल्यवान है, समय बड़ा बलवान है मगर फिर भी जीवन में कई बार हम किसी काम को समय पर शुरू नहीं कर पाते। कभी परिस्थितियाँ रोकती हैं, कभी असफलता का डर, कभी आलस्य और कभी यह सोच कि अब तो बहुत देर हो चुकी है। लेकिन सच यह है कि देर होना उतना बड़ा नुकसान नहीं है, जितना प्रयास करना ही छोड़ देना। प्रसिद्ध कहावत भी है “देर से आना न आने से बेहतर है।” इस छोटे से वाक्य मे जीवन की एक बड़ी सच्चाई छुपी हुई है।

बीता हुआ समय वापस नहीं आता इसलिए समय निकल जाने का अफसोस होना स्वाभाविक है। वर्तमान हमेशा हमारे हाथ मे होता है हमारे अधीन होता हैं,बस यही वो समय होता है जब हम उन कार्यों को समाप्त कर पाएँ जो कल नहीं हुए थे।

किसी परीक्षा की तैयारी देर से शुरू की गई हो, अपने सलोने सपने की ओर कदम देर से बढ़ा हो, किसी रिश्ते को सुधारने में काफ़ी देर हो गई हो या जीवन में बदलाव लाने का निर्णय लेते-लेते देर हो गई हो। कुछ भी हो इतना हमेशा याद रखें, जब तक सांस है, तब तक संभावना है। देर से शुरू किया गया सफर भी मंज़िल तक पहुँचा सकता है।

कोई हमसे पहले सफल हो गया, कोई हमसे पहले अपना लक्ष्य हासिल कर गया और कोई हमसे पहले अपनी पहचान बना गया तो भी क्या हुआ। जीवन कोई रेस नहीं है जिसमें सभी को एक ही समय पर एक ही स्थान पहुँचने की बाध्यता हो। यहाँ हर व्यक्ति की परिस्थितियाँ, सभी का संघर्ष और सभी की यात्रा अलग है। यहाँ तक किसी का सूर्योदय जल्दी होता है तो किसी का थोड़ा ठहर कर। मगर याद रहे देर से उगा सूरज भी उतनी ही रोशनी देता है।

गौर से देखें तो हमारे सामने बड़ी चुनौती समय की कमी नहीं होती बल्कि शुरुआत करने का डर सबसे बड़ा संकट होता है। हर बार देर हो जाने के बाद हम सोचते रहते हैं “अब क्या फायदा?” यही नकारात्मक विचार हमारे कदम रोक देता है। जबकि सच्चाई यह है कि आज उठाया गया एक छोटा सा कदम भी हमारे आने वाले कल को बदल सकता है।

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रामचरितमानस की पंक्ति “करम प्रधान विश्व करि राखा” हमारा मार्गदर्शन करते हुए कहती है कि कर्म जीवन में सर्वोपरि है।हितोपदेश की पंक्ति उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः इसका अर्थ है कार्य केवल इच्छा करने से नहीं बल्कि प्रयास करने से सिद्ध होते हैं। इसलिए देर से जागा हुआ व्यक्ति समय के नाम पर रोने की बजाय अपनी ऊर्जा और शेष समय उस दिशा में लगाए जो उसे लक्ष्य के नज़दीक लेकर जाए।

सही समय पर शुरुआत करने से ज़्यादा महत्वपूर्ण शुरुआत करके लगातार उस दिशा में बढ़ते रहना होता है। देर से सही मगर शुरुआत कीजिए लेकिन उसके बाद अब मत रुकिए। कोई भी सपना इसलिए अधूरा मत छोड़िए कि उसे पूरा करने में देर हो गई है। यदि कोई किताब लिखना चाह रहे तो आज ही पहला पन्ना लिख डालिए। जो कुछ भी सीखना हो उसका पहला पाठ आज ही सीखिए। यदि सेहत सुधारना हो तो ऐसा मानिए कि आज का दिन इस शुरुआत के लिए सबसे शुभ है, बस पहला कदम अभी उठाइए। किसी से मनमुटाव है और सम्बन्ध में सुधार की दरकार है तो आज ही कीजिए संवाद की शुरुआत। देर से शुरू होना असफलता नहीं है बल्कि कोशिश छोड़ देना असली असफलता है।

“Better late than never” यह Proverb जीवन में पिछड़ जाने वालों के लिए सिर्फ़ ढाँढस नही है बल्कि उनके लिए फिर से नई शुरुआत का शंखनाद है।महत्वपूर्ण यह नहीं कि हम कितना चले बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हमने चलना शुरू किया भी है या नहीं। इच्छा और संभावना साथ-साथ जीती हैं। प्रयास करते रहिए क्योंकि आपकी मंज़िलों को आज भी आपका इंतज़ार है।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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