Maharashtra SIR In Bombay High Court: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) में मतभेद पर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के खुलासे के बाद से देश की राजनीति में कोहराम मचा हुआ है। पूरा विपक्ष इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ( CEC Gyanesh Kumar) और मोदी सरकार पर हमलावर है। विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने और गिरफ्तार करने की मांग कर रहा है। इसी बीच विभिन्न राज्यों में कटे वोटरों को एक बार फिर बवाल शुरू गया है। चुनाव आयोग में मचे तूफान के बीच महाराष्ट्र एसआईआर पर बवाल मच गया है। चुनाव आयोग की महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट और कोल्हापुर बेंच में दो याचिकाएं दाखिल की गई है। दोनों याचिकाओं पर अगले हफ्ते तत्काल सुनवाई की उम्मीद है।
पहली याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के 14 आदेशों को चुनौती दी गई है। साथ ही दो इलेक्शन कमिश्नरों की आपत्तियों का जिक्र है। दूसरी याचिका में बूथ अधिकारियों की मनमानी और बिना सुनवाई वोटर हटाने का आरोप है।
कोल्हापुर बेंच में दाखिल पहली याचिका तीन स्थानीय निवासियों ने वकील असीम सरोदे की टीम के जरिए दायर की है। इसमें चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 14 बार वोटर हटाने, डेटाबेस एक्सेस, सॉफ्टवेयर में रुकावट और फॉर्म 6 में जुलाई महीने में हुए बदलावों पर आपत्ति जताई थी। याचिका में इसे CEC और Other ECs Act, 2023 की धारा 18 का उल्लंघन बताया गया है। जबकि दूसरी याचिका मुंबई की प्रिंसिपल बेंच में वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के युवा अध्यक्ष सागर रमेश गायकवाड़ और एक अन्य निवासी ने दाखिल की है। इसे वकील हेमंत घडीगांवकर, संदेश मोरे और हितेंद्र गांधी पेश कर रहे हैं। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के ADR फैसले का हवाला देते हुए दावा करती है कि बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर पहचान पत्र मांग रहे हैं, जो चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ है।
मामले की जांच के लिए स्वतंत्र समिति बनाने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने साफ किया है कि वे चुनाव रोकना नहीं चाहते, बल्कि सिर्फ कानून का सही पालन चाहते हैं। दोनों याचिकाओं में हटाए गए वोटरों को वापस जोड़ने, महाराष्ट्र में SIR पर रोक लगाने और मामले की जांच के लिए रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है।
मीडिया रिपोर्ट में क्य़ा खुलासा
बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस ने खुलासा किया है कि दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi ) ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बिना जानकारी दिए मुख्य चुमनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फैसले लिए। दोनों चुनाव आयुक्त ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है। शिकायत में सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील, वोटर लिस्ट की सुरक्षा और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई है।
तीन चुनाव आयुक्तों का पैनल है चुनाव आयोग
बता दें कि चुनाव आयोग के बड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ, दो अन्य चुनाव आयुक्तों का पैनल लेता है। इनमें से दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एपआईआर में लिए फैसले पर आपत्तियां जताई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई मसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने अपनी आपत्तियां जताई. उन्होंने 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं। दोनों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और फैसले आयोग के सामने बहुमत के आधार पर नहीं रखे गए।
SIR पर चुनाव आयोग में फूट! 10 महीने में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने फैसलों पर जताई नाराजगी, जानकारी के बिना निर्णय लेने का लगाया आरोप
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