अभिषेक सेमर, तखतपुर। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माने जाने वाले विशेष संरक्षित जनजातीय समुदाय बैगा परिवारों के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। ग्राम पंचायत भीमपुरी के आश्रित ग्राम राम्हेपुर बैगा पारा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में 52 बच्चों की पढ़ाई महज एक शिक्षक के भरोसे चल रही है। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से स्कूल एकल शिक्षक के सहारे संचालित होने के कारण पांच कक्षाओं के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना चुनौती बन गया है।
राम्हेपुर बैगा पारा में बैगा जनजाति के 50 से अधिक परिवार निवासरत हैं। इन परिवारों के बच्चों के लिए गांव में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्कूल संचालित है, लेकिन शिक्षक की कमी ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल में कक्षा पहली से पांचवीं तक के 52 बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल एक शिक्षक होना अपने आप में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने ला रहा है।


एक शिक्षक कैसे संभाले पांच कक्षाएं?
एक ही शिक्षक के जिम्मे पांच कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई होने से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर सभी कक्षाओं का नियमित अध्यापन किस तरह कराया जा रहा होगा? एक शिक्षक को एक साथ अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों पर ध्यान देना पड़ रहा है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
शिक्षक की कमी का असर अब बच्चों की उपस्थिति पर भी दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार कई बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ बच्चों के परिजनों ने टीसी कटवाकर उन्हें तीन से चार किलोमीटर दूर दूसरे स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया है। इससे बैगा परिवारों के सामने बच्चों की शिक्षा जारी रखने के साथ-साथ रोजाना आने-जाने की अतिरिक्त परेशानी भी खड़ी हो गई है।

जर्जर भवन ने बढ़ाई परेशानी
समस्या सिर्फ शिक्षकों की कमी तक सीमित नहीं है। प्राथमिक शाला का भवन भी जर्जर हालत में पहुंच चुका है। बारिश के दिनों में स्कूल की छत से पानी टपकने की स्थिति बन जाती है। ऐसे में मासूम बच्चों को जान जोखिम में डालकर जर्जर भवन में पढ़ाई करने की मजबूरी बनी हुई है। स्कूल भवन की स्थिति को देखते हुए कई बार बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और उन्हें अस्थायी रूप से आंगनबाड़ी केंद्र में अध्यापन कराना पड़ता है। सवाल यह है कि जिन बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं चला रही है, उन्हें अपने ही गांव में एक सुरक्षित स्कूल भवन और पर्याप्त शिक्षक क्यों नहीं मिल पा रहे हैं?

एक शिक्षिका तीन महीने की छुट्टी पर, वर्तमान शिक्षक भी अटैचमेंट
जानकारी के अनुसार राम्हेपुर प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षिका वर्तमान में तीन महीने की छुट्टी पर हैं। वहीं स्कूल में जो शिक्षक वर्तमान में अध्यापन कार्य कर रहे हैं, उनके संबंध में भी अटैचमेंट में होने की बात सामने आ रही है। ऐसी स्थिति में स्कूल की पूरी व्यवस्था अस्थायी इंतजामों पर निर्भर नजर आ रही है।
भाजपा नेता ने बताया अधिकारियों की लापरवाही
भाजपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष एवं क्षेत्र के जनपद सदस्य श्याम सिंह ध्रुव ने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शासन द्वारा बैगा जनजातीय परिवारों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास को लेकर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद ग्राम पंचायत भीमपुरी के आश्रित ग्राम स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में एक वर्ष से अधिक समय से शिक्षक की कमी बनी हुई है। वर्तमान में पदस्थ शिक्षक भी अटैचमेंट पर हैं, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि प्राथमिक शाला में जल्द शिक्षक की नियमित पदस्थापना की जाए, ताकि बैगा जनजाति के बच्चों को बेहतर और नियमित शिक्षा मिल सके।
बड़ा सवाल – बच्चों को कैसे मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
सरकार आदिवासी और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने और बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की बातें लगातार कही जाती हैं, लेकिन राम्हेपुर बैगा पारा का यह स्कूल इन दावों के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा कर रहा है। एक तरफ 52 बच्चों के लिए एक शिक्षक, दूसरी तरफ जर्जर स्कूल भवन और बारिश में टपकती छत—इन परिस्थितियों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित शिक्षा कैसे मिलेगी, यह बड़ा सवाल है।
युक्तियुक्तकरण के बाद भी शिक्षक का इंतजार
प्रदेश में पिछले वर्ष शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए चलाए गए युक्तियुक्तकरण अभियान के बावजूद राम्हेपुर प्राथमिक शाला की समस्या दूर नहीं हो सकी। यहां पदस्थ शिक्षक द्वारा स्टे लेकर अपने मूल स्थान पर वापस चले जाने के बाद अब तक दूसरे शिक्षक की पदस्थापना नहीं की गई है। इसके चलते 52 बच्चों की पढ़ाई आज भी एक शिक्षक के भरोसे चल रही है।
कब मिलेगा बैगा बच्चों को शिक्षा का अधिकार?
बैगा परिवारों के बच्चों की शिक्षा का सवाल अब सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि स्कूल में तत्काल पर्याप्त शिक्षकों की पदस्थापना की जाए और जर्जर भवन की जगह नए भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में शिक्षा मिल सके।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, BEO ने फोन तक नहीं उठाया
शिक्षक की कमी को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी दीपक गुप्ता से फोन के माध्यम से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने न तो फोन रिसीव किया और न ही बाद में दोबारा संपर्क कर अपना पक्ष रखा। मामले में विभागीय अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आ सका।
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