अम्बाला, ( अनिल शर्मा)। खंड साहा के अंतर्गत आने वाले गांव गोकलगढ़ में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब ग्रामीणों का अपने घरों के आंगन में भी सुरक्षित रहना दूभर हो गया है। ताजा मामले में गांव के ही एक पुरुष और एक महिला पर आवारा कुत्तों ने जानलेवा हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया।
घायलों को उपचार के लिए नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। इस घटना के बाद से पूरे गांव में प्रशासन के खिलाफ रोष और आवारा कुत्तों को लेकर भय का माहौल बना हुआ है।
घर में काम कर रहे व्यक्ति पर पीछे से हमला
घटना की जानकारी देते हुए पीड़ित वीरेंद्र शर्मा पुत्र धर्मपाल शर्मा, निवासी गोकलगढ़ ने बताया कि वह अपने घर के अंदर खड़े रूटावेटर पर कुछ काम कर रहे थे। उसी समय अचानक पीछे से एक आवारा कुत्ते ने उन पर हमला बोल दिया।
कुत्ता इतना हिंसक था कि उसने वीरेंद्र की कमर पर एक के बाद एक 7 से 8 बार अपने दांत गड़ा दिए। वीरेंद्र के शोर मचाने पर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया।
परिजनों द्वारा उन्हें तुरंत मुलाना के नागरिक अस्पताल ले जाया गया। वीरेंद्र की गंभीर हालत को देखते हुए वहां मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया और बेहतर इंजेक्शन व इलाज के लिए अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया। अंबाला कैंट में उचित उपचार मिलने के बाद अब उन्हें घर भेज दिया गया है, लेकिन वे अभी भी सदमे में हैं।

महिला को भी टांग पर काटा
उसी दिन गांव की एक अन्य निवासी रजविंदर कौर पत्नी जरनैल सिंह भी आवारा कुत्ते के कोप का भाजन बनीं। रजविंदर कौर ने बताया कि वह अपने घर के दैनिक कार्यों में व्यस्त थीं, तभी एक आवारा कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया और उनकी टांग पर बुरी तरह काट लिया। महिला ने बताया कि गांव में कुत्तों का झुंड घूमता रहता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना भी खतरनाक हो गया है।
प्रशासनिक अनदेखी से ग्रामीणों में भारी रोष
गांव गोकलगढ़ के निवासियों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा:

सुरक्षा का अभाव: बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं और महिलाएं घर के बाहर निकलने में कतराती हैं।
नसबंदी अभियान की मांग: ग्रामीणों ने मांग की है कि इन कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाए और इनकी नसबंदी की जाए ताकि आबादी पर नियंत्रण पाया जा सके।
इलाज की सुविधा: ग्रामीणों ने यह भी मुद्दा उठाया कि स्थानीय स्तर पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन और पर्याप्त उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में अंबाला कैंट तक न दौड़ना पड़े।
साहा ब्लॉक में बढ़ता खतरा
गौरतलब है कि साहा और आसपास के क्षेत्रों में आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या एक गंभीर रूप ले चुकी है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने उचित कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। फिलहाल, गोकलगढ़ के ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और पंचायत विभाग से अपील की है कि गांव को इन खूंखार कुत्तों से निजात दिलाई जाए ताकि लोग चैन की सांस ले सकें।
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