पटना। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन द्वारा भेजे गए 5 करोड़ के मानहानि नोटिस और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी कानूनी धमकी, पद या सत्ता के दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। सांसद ने कहा कि जनता ने उन्हें अधिकारों और न्याय की रक्षा के लिए संसद भेजा है, इसलिए वे जनहित के मुद्दों पर चुप नहीं बैठेंगे।

​बिलौटी गांव हत्याकांड और शीर्ष कमान की जवाबदेही पर उठाए सवाल

​सुधाकर सिंह ने भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भारत भूषण तिवारी की संदिग्ध मृत्यु का मुद्दा उठाते हुए इसे महज़ ‘पुलिस ऑपरेशन’ बताए जाने को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी कार्रवाई बिना शीर्ष पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के संभव नहीं है। अक्सर विवादों में निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को बलि का बकरा बना दिया जाता है, जबकि निर्णय लेने वाले आला अधिकारियों को जांच से बाहर रखा जाता है।

​तत्कालीन एसटीएफ डीजी कुंदन कृष्णन की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग

​सांसद ने रेखांकित किया कि घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार एसटीएफ के डीजी पद पर तैनात थे। इसलिए उस समय की निर्णय प्रक्रिया, पुलिस कमान और मुख्यालय की भूमिका की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं, माता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई है और सरकार ने खुद न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, तो सवाल उठाने वाले जनप्रतिनिधि को लीगल नोटिस भेजना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

​जमुई घटना पर नैतिक दायित्व

​भारत भूषण तिवारी प्रकरण के साथ-साथ सांसद ने जमुई में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाना प्रशासन का बुनियादी कर्तव्य है। सुधाकर सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने अधिवक्ताओं को कानूनी नोटिस का विधिसम्मत जवाब देने का निर्देश दे दिया है। वे न तो माफी माँगेंगे और न ही 5 करोड़ के मुकदमे से पीछे हटेंगे।

​सांसद सुधाकर सिंह की प्रमुख मांगें:

  • ​भारत भूषण तिवारी की मृत्यु की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की जाए।
  • ​तत्कालीन पुलिस कमान, पुलिस मुख्यालय और निर्णय लेने वाले शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की जांच हो।
  • ​केवल निचले स्तर के जवानों पर जिम्मेदारी डालकर उच्चस्तरीय अफसरों को बचाया न जाए।
  • ​तिवारी के परिजनों और जमुई की पीड़िता को न्याय दिलाया जाए।

​सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में कानून सबके लिए बराबर है और वर्दी को जवाबदेही से ऊपर नहीं रखा जा सकता। वे इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाते रहेंगे।