अभय मिश्रा, मऊगंज। Chini Ka Rate Today: मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का दावा उस वक्त सवालों के घेरे में आ गया, जब प्रदेश के अति-गरीब परिवारों के राशन से मिठास गायब हो गई। शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से अति गरीबी रेखा में आने वाले लगभग 12 लाख अंत्योदय कार्ड धारकों को मिलने वाली 20 रुपये प्रति किलो की रियायती शक्कर अप्रैल माह से पूरी तरह बंद है। एक तरफ खुले बाजार में शक्कर की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अति-गरीब परिवारों को मिलने वाला कोटा ठप होना प्रशासनिक दावों और सरकारी नीतियों पर सवाल खड़े करता है।

हमारी पड़ताल: aEPDS पोर्टल पर आंकड़े ‘शून्य’, अधिकारी बेबस

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के एईपीडीएस (aEPDS) पोर्टल पर हमारी पड़ताल में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार:

* जनवरी: 12,51,418 किलो शक्कर का आवंटन
* फरवरी: 12,35,167 किलो शक्कर का आवंटन
* मार्च 12,58,320 किलो शक्कर का आवंटन
* अप्रैल से अगस्त: आवंटन पूरी तरह ‘शून्य’

इस संबंध में जब मैदानी अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने साफ शब्दों में पल्ला झाड़ते हुए कहा कि शक्कर का आवंटन ऊपर (शासन/केंद्र स्तर) से ही नहीं आ रहा है, जिसके कारण वितरण संभव नहीं है।

इथेनॉल नीति पर बिफरा विपक्ष: इंडियन नेशनल कांग्रेस और AAP हमलावर

शक्कर की किल्लत और बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक गलियारों में जुबानी जंग तेज हो गई है। इंडियन नेशनल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार गन्ने का उपयोग बड़े पैमाने पर इथेनॉल बनाने के लिए कर रही है। इथेनॉल उत्पादन की वजह से चीनी मिलों में शक्कर का उत्पादन गिरा है। उत्पादन कम होने से बाजार में शक्कर के दाम बेतहाशा बढ़े हैं और इस नीतिगत संकट का सीधा खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है।

महंगाई की दोहरी मार: 70 रुपये किलो शक्कर, चाय भी हुई महंगी

रियायती शक्कर बंद होने से गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। जमीनी हालात (जैसे मऊगंज जिले का उदाहरण) बताते हैं कि जो 50 किलो की बोरी पहले 2,000 रुपये में मिलती थी, वह अब 3,225 रुपये की हो चुकी है। बाजार में शक्कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो बिक रही है। शक्कर महंगी होने से आम दुकानों पर 10 रुपये में मिलने वाली चाय अब 15 रुपये में मिल रही है।

एक तरफ गन्ने से इथेनॉल बनाने की नीति पर उठते सवाल और दूसरी तरफ PDS दुकानों से अप्रैल से शक्कर गायब होना—इस पूरे प्रकरण ने विपक्ष को और हमलावर कर दिया है। सवाल यह है कि बाजार में लगभग दोगुनी कीमत पर बिक रही शक्कर के बीच 12 लाख अंत्योदय कार्ड धारकों को उनका हक कब मिलेगा?

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