गर्मी का मौसम तपन और असहनीय प्यास का समय होता है. ऐसे में यदि आप राहगीरों, जरूरतमंदों या पशु-पक्षियों को छाछ, शरबत, ठंडा पानी या बेल का शरबत जैसे शीतल पेय पिलाते हैं, तो यह केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि अत्यंत पुण्यदायक धार्मिक कर्म माना गया है.
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धार्मिक दृष्टिकोण से लाभ: शास्त्रों के अनुसार “परोपकाराय पुण्याय” अर्थात दूसरों की भलाई ही सच्चा पुण्य है. गरुड़ पुराण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण में उल्लेख है कि भीषण गर्मी में किसी प्यासे को जल पिलाना अग्निदोष, पितृदोष और चांडाल दोष जैसे कर्मज दोषों से मुक्ति दिलाता है. यह पूर्वजों की आत्मा की शांति का मार्ग भी बनता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जलदान और शीतल पेय का दान राहु-केतु के दोष, चंद्रमा की अशांति और कालसर्प योग के प्रभाव को शांत करता है.
पुण्य फल: पितरों की कृपा मिलती है. घर में शांति और सुख-समृद्धि बढ़ती है. संतान को अच्छे संस्कार और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है.

