पटना जिले के बिहटा प्रखंड स्थित सिकंदरपुर औद्योगिक क्षेत्र से 25 टन मखाना लेकर सात कंटेनर ट्रकों को आधिकारिक तौर पर ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना किया गया। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इन कंटेनरों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल राज्य के मखाना उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी।

​परिवहन और सप्लाई चैन की प्रक्रिया

​JITBAN SUPPLY CHAIN के महत्वपूर्ण सहयोग से भेजी जा रही मखाना की यह विशाल खेप सबसे पहले बिहटा स्थित इनलैंड ड्राई पोर्ट डिपो पहुंचेगी। इसके पश्चात, इन कंटेनरों को सुरक्षित रूप से रेल मार्ग के माध्यम से कोलकाता भेजा जाएगा। कोलकाता बंदरगाह पर पहुंचने के बाद इस मखाना को समुद्री मार्ग के जरिए ऑस्ट्रेलिया के बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग और कस्टम विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

​पैकेजिंग इकाई का निरीक्षण और किसानों की समस्याएं

​कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने JITBAN SUPPLY CHAIN की मखाना पैकेजिंग इकाई का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने वहां मखाना की आधुनिक पैकेजिंग, प्रसंस्करण और वैश्विक निर्यात की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही, उन्होंने दरभंगा, पूर्णिया, अररिया और सीमांचल क्षेत्र से आए मखाना किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।
​दरभंगा से पहुंचे किसान राज कुमार सिंह ने बताया कि वे निजी पूंजी से खेती करते हैं और पहले उन्हें मजबूरन कम दामों पर व्यापारियों को उपज बेचनी पड़ती थी। महिला किसान अंबिका देवी ने भी अपनी आजीविका का मुख्य साधन मखाना खेती को बताते हुए सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ न मिलने की बात कही। किसानों ने खेती के लिए वित्तीय सहायता, उचित न्यूनतम मूल्य और तकनीकी मदद की मांग रखी।

​सरकार का आश्वसन और वैश्विक बाजार की उम्मीदें

​किसानों की समस्याएं सुनने के बाद कृषि मंत्री ने उन्हें हरसंभव सरकारी मदद और समर्थन देने का पूरा भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने और डबल इंजन सरकार के ठोस प्रयासों से बिहार लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है।
​बिहार से सीधे ऑस्ट्रेलिया के लिए मखाना की इस पहली खेप के रवाना होने से स्थानीय उत्पादकों, प्रोसेसर्स और निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजार के नए द्वार खुल गए हैं। स्थानीय श्रमिकों ने भी उम्मीद जताई है कि इस उद्योग के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और श्रमिकों की मजदूरी व सामाजिक सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।