Former CJI YK Sabharwal: भारत के पूर्व सीजेआई वाईके सभरवाल (योगेश कुमार सभरवाल) के बेटों खिलाफ आयकर जांच का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने शेयर बिक्री और दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीद जांच के आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस वाईके सभरवाल के दोनों बेटों चेतन सभरवाल और नितिन सभरवाल (Chetan Sabharwal and Nitin Sabharwal) के खिलाफ दिल्ली के सिकंदरा रोड पर खरीदी गई प्रॉपर्टी के मामले में आयकर विभाग की दोबारा असेसमेंट की कार्रवाई को हरी झंडी दी।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने दोनों भाइयों की ओर से दायर चार अपीलों को खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ ही 2007 के शेयर सौदे और दिल्ली के सिकंदरा रोड पर प्रॉपर्टी खरीद से जुड़े आयकर री-असेसमेंट नोटिस को बरकरार रखा है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी लेनदेन की सच्चाई जानने के लिए जांच की जरूरत महसूस करना और जांच के बाद नोटिस जारी करने के लिए पर्याप्त आधार होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। अदालत के मुताबिक, इस मामले में आयकर अधिकारी ने केवल किसी अस्पष्ट आशंका के आधार पर कार्रवाई नहीं की थी। उनके सामने जांच रिपोर्ट के रूप में ठोस सामग्री मौजूद थी। इसके आधार पर टैक्स योग्य आय के आकलन से छूटने की आशंका पैदा हुई। इसी वजह से कोर्ट ने आयकर विभाग के नोटिस को वैध माना और दोनों भाइयों की चारों अपीलें खारिज कर दीं।

दरअसल यह मामला साल 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड पर खरीदी गई एक प्राइम प्रॉपर्टी से जुड़ा है। आयकर विभाग को शक था कि इस प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम दो कंपनियों के शेयरों की बिक्री से हासिल हुई थी। विभाग ने शेयरों की बिक्री में तय की गई कीमत और उनकी वास्तविक कीमत के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल उठाए थे। जांच में यह भी सामने आया कि शेयर बेचकर मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया था। इसके बाद आयकर विभाग ने दोनों भाइयों के टैक्स असेसमेंट की दोबारा जांच शुरू की थी।

2007 में हुआ था समझौता

अक्टूबर 2007 में चेतन सभरवाल, नितिन सभरवाल और दो अन्य शेयरधारकों ने पवन इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड (Pawan Impex Pvt Ltd) और एसवीआईआईटी सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड (SVIIT Software Pvt Ltd) के शेयर बेचने का समझौता किया था। ये शेयर जीवाईएस रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड (GYS Real Estate Pvt Ltd) को बेचे जाने थे। दोनों कंपनियों के शेयरों की बिक्री के लिए क्रमशः 195 करोड़ रुपये और 60 करोड़ रुपये की कीमत तय की गई थी। समझौते के मुताबिक, प्रत्येक शेयरधारक को बिक्री की कुल रकम में एक चौथाई हिस्सा मिलना था।

शेयरों की कीमत पर हुआ शक

बाद में आयकर विभाग ने इस शेयर ट्रांजैक्शन की जांच की। जांच के दौरान विभाग ने पाया कि शेयरों की बिक्री से मिलने वाली रकम उन कंपनियों की संपत्तियों में मौजूद जमीन और इमारतों की वास्तविक कीमत के मुकाबले काफी ज्यादा दिखाई दे रही थी। विभाग ने शुरुआती तौर पर माना कि शेयरों की कीमत तय करने में वास्तविक मूल्य से काफी अधिक रकम दिखाई गई हो सकती है। इसी आधार पर शेयरों की बिक्री से प्राप्त रकम और उससे जुड़े टैक्स के पहलुओं की जांच की गई। विभाग ने इस मामले में डायरेक्टर जनरल की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की। आयकर विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि शेयरों की बिक्री से मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा अप्रैल 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड स्थित प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल किया गया था।

‘रीजन टू बिलीव’ का मतलब अंतिम सबूत होना नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि ‘रीजन टू बिलीव’ का अर्थ किसी अधिकारी के पास यह मानने का उचित कारण या आधार होना है कि टैक्स योग्य आय का आकलन छूट गया है। इसके लिए असेसिंग ऑफिसर को नोटिस जारी करने से पहले ही यह अंतिम रूप से साबित करना जरूरी नहीं है कि टैक्स चोरी हुई है या कोई आय छिपाई गई है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर अधिकारी के पास उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच की जरूरत का उचित आधार होना पर्याप्त है। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अदालतें इस बात का मूल्यांकन नहीं कर सकतीं कि अधिकारी के पास मौजूद कारण पर्याप्त हैं या नहीं।

कौन थे पूर्व चीफ जस्टिस वाईके सभरवाल

वाईके सभरवाल भारत के 36वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रह चुके हैं। उन्होंने 1 नवंबर 2005 को देश के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था और 14 जनवरी 2007 तक इस पद पर रहे थे। उनका न्यायिक करियर दिल्ली हाई कोर्ट, बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक फैला रहा।

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