OBC Reservation: ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर (Creamy layer) पर केंद्र सरकार की अर्जी सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो गई है। केंद्र सरकार ने कोर्ट के फैसले को लागू करने में छूट मांगी थी। कोर्ट ने फैसले में कहा था कि क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की आमदनी देखना काफी नहीं है। उनका पद और सामाजिक स्थिति को भी देखा जाना चाहिए।
केंद्र ने अचानक इसे लागू करने से जटिलता बढ़ने का हवाला देते हुए UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 और 2026 के लिए छूट की मांग की थी। हालांकि देश के शीर्ष न्यायालय ने केंद्र सरकार की अर्जी खारिज कर दी है।
केंद्र सरकार ने अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर फैसले पर स्पष्टीकरण की मांग की थी। केंद्र का तर्क था कि फैसले को तुरंत लागू करने से कई प्रशासनिक परेशानियां पैदा हो सकती हैं। सिविल सेवा परीक्षा 2025 के कैडर और सेवाओं का आवंटन, प्रशिक्षण और दूसरी प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कोर्ट ने सरकार के 2004 के उस आदेश को गलत माना था, जिसमें वेतन से आय के आधार पर PSU, बैंक और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बच्चों को क्रीमी लेयर या नॉन क्रीमी लेयर में नियम लागू किया गया था। इसी आदेश में सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को इस नियम से अलग रखा गया था। उनके लिए व्यवस्था थी कि उनके पद के आधार पर उनके बच्चों की श्रेणी तय की जाएगी। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में दिए समानता के अधिकार के खिलाफ माना था।
बता दें कि 2016 के बाद केंद्र सरकार, रेलवे, बैंक, अर्धसैनिक बलों और विश्वविद्यालयों में करीब 3 लाख 70 हज़ार ओबीसी नियुक्तियां हुई हैं। अगर फैसले को पिछली तारीख से लागू किया गया तो बड़ी संख्या में नए विवाद और मुकदमे हो सकते हैं।
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