Supreme court On Tarun Tejpal: तहलका (Tehelka) के पूर्व एडिटर-इन-चीफ (पूर्व संपादक) तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। देश के शीर्ष न्यायालय ने तरुण तेजपाल के सरेंडर से छूट देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तरुण तेजपाल को दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तरुण तेजपाल को 22 सितंबर तक सरेंडर कर उसका सर्टिफिकेट कोर्ट में जमा करना होगा। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी।
बता दें कि रेप केस में तहलका (Tehelka) के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट से 10 साल कैद की सजा सुनाई है। दालत ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था। तरुण तेजपाल हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ याचिका दायर राहत की मांग की थी।
तेजपाल के वकील कपिल सिब्बल ने सरेंडर से छूट देने वाली इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन को 31 अगस्त को सूचीबद्ध करने की मांग की थी। उनकी दलील थी कि जब तक इस आवेदन पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक तेजपाल को सरेंडर करने से राहत दी जाए। जबकि गोवा सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के नियमों और पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दोषी को पहले सरेंडर करना होगा। अगर उसने सरेंडर नहीं किया है तो उसकी अपील को तब तक सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता, जब तक उसके साथ सरेंडर से छूट की अर्जी न हो। शीर्ष न्यायालय ने मेहता की दलीलों को स्वीकार करते हुए तेजपाल को दो हफ्ते में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

तरुण तेजपाल का जानें पूरा मामला
दरअसल पूरा मामला नवंबर 2013 का है। तेजपाल की पूर्व महिला सहयोगी ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में आयोजित ‘तहलका’ कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया था। मई 2021 में सेशंस कोर्ट से बरी होने के बाद राज्य सरकार ने फैसले के खिलाफ अपील की थी। जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामदार की बेंच ने तीन दिन की अंतिम सुनवाई के बाद 30 जुलाई को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। आज स्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामदार की बेंच ने मापुसा की सेशंस कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए तरुण तेजपाल रेप केस में दोषी करार दिया। बेंच ने तेजपाल को IPC की धारा 376(2)(f) और 376(2)(k) के तहत रेप और सेक्शुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) का दोषी माना। साथ ही धारा 354 A और 354 B के तहत भी दोषी ठहराया था।
अब तेजपाल ने सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और सरेंडर से छूट की मांग की है। वहीं, गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनकी सजा को बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की है। हालांकि, सरकार ने उनकी दोषसिद्धि को चुनौती नहीं दी है। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद तेजपाल को तय समय में आत्मसमर्पण करना होगा।
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