अयोध्या. सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की जगह को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. याचिका में सवाल उठाया गया था कि क्या राम मंदिर उसी जमीन पर बनाया गया है, जिसके लिए 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आदेश दिया था. याचिकाकर्ता ने जमीन के रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेजों के आधार पर इसकी पुष्टि कराने की मांग की थी.

इसे भी पढ़ें- लखीमपुर में बेकाबू डंपर ने 4 लोगों को रौंदा, 2 साल के मासूम समेत 3 की मौत

स्वतंत्र आयोग बनाने की भी थी मांग

याचिका में अदालत से एक स्वतंत्र समिति या आयोग बनाने की मांग की गई थी. इसमें सर्वे, राजस्व, पुरातत्व और तकनीकी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव था. याचिकाकर्ता चाहता था कि विशेषज्ञों की टीम जमीन के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच करे. इससे यह पता लगाया जा सके कि मौजूदा राम मंदिर उसी जगह पर बना है या नहीं, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था.

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 नवंबर 2019 को अयोध्या भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. अदालत ने विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था. साथ ही केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में किसी प्रमुख स्थान पर मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था.

5 अगस्त 2020 को शुरू हुआ था निर्माण

राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त 2020 को हुआ था. इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देखरेख में निर्माण कार्य शुरू किया गया. मंदिर के गर्भगृह और पहले तल का निर्माण पूरा होने के बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई.

इसे भी पढ़ें- रवि किशन और संजय निषाद मिलकर फिल्म बनाएं, डायलॉग हिट होंगे… गोरखपुर में CM योगी की चुटकी

PM मोदी बने थे मुख्य यजमान

प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य यजमान के रूप में शामिल हुए थे. इस दौरान रामलला के बाल स्वरूप की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई. समारोह के बाद मंदिर को आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया. अब मंदिर की जमीन से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है.