चंडीगढ़। पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में नशामुक्त राज्य बनाने के लिए छेड़ी गई जंग के प्रभावी और सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस दौरान न केवल मामलों के पंजीकरण में वृद्धि हुई है, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने की दर (कनविक्शन रेट) में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों (2022-2026) में न केवल ड्रग तस्करों पर सख्त कार्रवाई की गई है, बल्कि नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ दी गई है। राज्य में 2017-2021 की तुलना में 2022-2026 के बीच की गई कार्रवाई के आंकड़े नशा विरोधी अभियान की सफलता की कहानी बयां करते हैं।

सिंथेटिक ड्रग्स पर कसी नकेल

पंजाब पुलिस ने विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। आंकड़ों के मुताबिक, आइस (क्रिस्टल मेथामफेटामाइन) की बरामदगी में 447% का भारी उछाल दर्ज किया गया है, जो 17 किलो से बढ़कर 93 किलो तक पहुंच गई है। वहीं, कोकीन की बरामदगी 6,064 किलो रही, जो पिछले वर्षों (6,852 किलो) के स्तर के लगभग बराबर है, जो तस्करों पर लगातार दबाव को दर्शाता है।

रणनीति में बड़ा बदलाव

पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कार्रवाई महज आंकड़ों की वृद्धि नहीं है, बल्कि नशे के खतरे से निपटने की रणनीति में एक बुनियादी बदलाव है।

DGP ने कहा कि आने वाले आंकड़े हमारी इंटेलिजेंस-आधारित कार्रवाई का प्रमाण हैं। हमने सप्लायर से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर तक, नशे की पूरी चेन पर लगातार दबाव बनाए रखा है। सजा की दर में हुआ सुधार यह साबित करता है कि हम मामलों को उनके तार्किक अंत तक ले जा रहे हैं।

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