ताम्रध्वज साहू का अभूतपूर्व स्वागत, क्या है छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सोशल इंजीनियरिंग का गेम प्लान

रायपुर. कांग्रेस में ओबीसी सेल के अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद रायपुर पंहुचे ताम्रध्वज साहू का कांग्रेस ने अभूतपूर्व स्वागत किया. सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ साहू समाज के लोग घंटो ताम्रध्वज का इंतज़ार करते रहे. इसके बाद उनका स्वागत रास्ते में किया गया. फिर कांग्रेस भवन पहुंचने पर भी ये सिलसिला चलता रहा. ताम्रध्वज का ताल्लुक पीसीसी के दफ्तर से बहुत ज़्यादा नहीं रहा है. लेकिन नियुक्ति के बाद बढ़ गया है. रायपुर पहुंचकर उन्होंने अपनी प्राथमिकता भी बता दी. कांग्रेस में ओबीसी सेल को सक्रिय करना. 

कांग्रेस लेखराम और ताम्रध्वज के जरिए साहू समाज को लामबंद करने की कोशिशों में जुटी है. जो भीड़ ताम्रध्वज के लिए जुटी वो भीड़ काफी कुछ कहती है. कुछ संकेत देती है. कुछ सवाल उठाती है. ताम्रध्वज की इस नियुक्ति से ये तो तय है कि वे अब कांग्रेस नेतृत्व के करीब पहुंच चुके हैं. प्रदेश में अब उनकी हैसियत पहली पंक्ति के नेताओं में  हो गई है.

इस पंक्ति में अब तक मोतीलाल वोरा के अलावा प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत जैसे नेताओं को गिना जाता था. रविंद्र चौबे, धनेंद्र साहू, सत्यनारायण शर्मा और मोहम्मद अकबर को भी इसी जमात का नेता माना जाता है. जबकि आदिवासी समुदाय से आदिवासी नेता रामदयाल उईके और सतनामी नेता शिव डहरिया और उप नेता प्रतिपक्ष कवासी लकमा का कद भी आलाकमान ने बढ़ाकर पहली पंक्ति के करीब पहुंचा दिया है. एसटी वर्ग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर मनोज मंडावी को भी प्रमोशन दिया गया.

माना जा रहा है कि ताम्रध्वज साहू का कद बढ़ाने का मकसद साहू वोट बैंक पर अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए किया गया है. साहू वोटबैंक प्रदेश में ओबीसी में सबसे बड़ी आबादी है. माना जाता है कि इस तबके का बड़ा वोटबैंक बीजेपी के पास है. कांग्रेस का केल्कुलेशन है कि जिस तरीके से उसने सरोज पांडेय के खिलाफ साहू समुदाय के लेखराम साहू को खड़ा किया. जबकि साहू समाज ने बीजेपी से राज्यसभा की टिकट अपने समाज के लिए मांगी थी. अब कांग्रेस ने फिर से साहू समाज के ताम्रध्वज साहू को आगे बढ़ा दिया है. कांग्रेस का मानना है कि इस फैसले से साहू वोट बैंक में उसकी पकड़ मजबूत होगी. माना जाता है कि सरोज पांडेय से साहू समाज नाराज़ रहता है. जिसकी वजह से मोदी लहर में भी सरोज पांडेय चुनाव हार गई थीं.

कांग्रेस को लगता है कि अब बीजेपी ने कुर्मी उम्मीदवार धरमलाल कौशिक की जगह सरोज पांडेय को जिस तरीके से राज्यसभा की टिकट कंफर्म की उससे ये समुदाय खुश नहीं होगा. जिसका फायदा कांग्रेस को होगा. कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि उसने अच्छे रणनीति के तहत ओबीसी के दो बड़ी जातियों को अपने पाले में लाने के लिए सफल कोशिश की है. कांग्रेस के पास बताने के लिए है कि बीजेपी कुर्मी समुदाय की उपेक्षा कर रही है. उसने पहले अपने सबसे वरिष्ठ कुर्मी सांसद रमेश बैस की वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए उन्हें केंद्र में मंत्री नहीं बनाया. फिर उसने धरमलाल कौशिक की उपेक्षा की.

जिस तरीके से ताम्रध्वज साहू के स्वागत में एयरपोर्ट पर भीड़ जुटी जिसमें साहू समाज के लोग बड़ी संख्या में थे. उसके बाद राम मंदिर चौक पर ताम्रध्वज का स्वागत किया गया. उससे लगता है कि शुरुआती स्तर पर कांग्रेस की रणनीति कारगर साबित हो रही है. चूंकि ताम्रध्वज साहू प्रदेश के साहू समाज के 21 सालों तक अध्य़क्ष रहे हैं लिहाज़ा उनकी समाज में पैठ का फायदा जबरदस्त होगा. ये बात भूपेश बघेल ने ज़ाहिर भी कर दी. भूपेश ने कहा कि साहू समाज में ताम्रध्वज काफी सक्रिय रहे हैं जिसका फायदा उन्हें चुनाव में होगा.

समाज के दूसरे कद्दावर नेता मोतीलाल साहू पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज़ होकर बीजेपी में चले गए. बीजेपी ने उनकी महत्ता को देखते हुए फौरन प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया. मोतीलाल इस वक्त दुर्ग जिले में पदयात्रा कर रहे हैं. उनकी नज़र विधानसभा टिकट पर है. चूंकि वो मंत्री राजेश मूणत के बेदह करीबी हैं. इसलिए टिकट की संभावना काफी ज़्यादा है. माना जा रहा है कि उनके जाने से जो नुकसान पार्टी को हुआ है उसकी भरपाई ताम्रध्वज से हो जाएगी.

 

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