रमेश सिन्हा, पिथौरा। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समय शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार को पिथौरा में धरना-प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में शिक्षक रैली निकालकर ज्ञापन सौंपने SDM कार्यालय पहुंचे, लेकिन ज्ञापन लेने के लिए कोई अधिकारी-कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। ऐसे में प्रदर्शनकारी शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
खेल मैदान से निकली रैली, SDM कार्यालय पहुंचकर दिया धरना
शिक्षकों के अनुसार, पूर्व सूचना के मुताबिक सभी शिक्षक निर्धारित समय पर शहीद भगत सिंह खेल मैदान में इकट्ठे हुए। यहां से रैली के रूप में शिक्षक एसडीएम कार्यालय पिथौरा पहुंचे। शिक्षकों ने अपनी मांगों और सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर नारेबाजी करते हुए प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। एसडीएम कार्यालय पहुंचने पर शिक्षकों ने देखा कि शनिवार होने के कारण कार्यालय में ताला लगा हुआ था। इसके बाद शिक्षक कार्यालय परिसर के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
पूर्व सूचना देने के बाद भी नहीं था ज्ञापन लेने कोई कर्मचारी
शिक्षकों का कहना है कि एसडीएम कार्यालय को पहले ही लिखित रूप से सूचित किया गया था कि वे शनिवार को स्कूल बंद होने के बाद कार्यालय पहुंचकर अपना ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बावजूद कार्यालय में ज्ञापन लेने के लिए कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं था।
शिक्षकों के मुताबिक, वे काफी देर तक कार्यालय परिसर में इंतजार करते रहे और धरने पर बैठे रहे। शिक्षकों ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी स्वयं उपलब्ध नहीं थे तो कम से कम एक कर्मचारी को ज्ञापन प्राप्त करने के लिए कार्यालय में उपस्थित रहना चाहिए था।
घंटों इंतजार के बाद भेजा गया कर्मचारी, तब लिया गया ज्ञापन
काफी देर तक इंतजार और मशक्कत के बाद एसडीएम कार्यालय की ओर से एक कर्मचारी को भेजा गया। इसके बाद शिक्षकों ने अपना ज्ञापन संबंधित कर्मचारी को सौंपा। इस दौरान शिक्षकों ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि पूर्व सूचना के बावजूद ज्ञापन लेने के लिए किसी कर्मचारी की मौजूदगी नहीं होना गंभीर विषय है।

सेवा सुरक्षा सहित विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन
शिक्षकों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, फेडरेशन ने सेवा सुरक्षा, वेतन विसंगति और पदोन्नति सहित शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया था। आवेदन में 22 अगस्त को पिथौरा में शांतिपूर्ण धरना एवं रैली आयोजित करने की जानकारी पूर्व में प्रशासन को दी गई थी। कार्यक्रम में करीब 500 शिक्षकों के शामिल होने का अनुमान भी आवेदन में उल्लेखित था।
शिक्षकों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण था और उनका उद्देश्य अपनी लंबित मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है। शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर शासन स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
पूर्व सूचना के बाद व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी- शिक्षक
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि शनिवार को कार्यालय बंद रहने की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने पहले से प्रशासन को कार्यक्रम और ज्ञापन सौंपने की सूचना दी थी। ऐसे में ज्ञापन प्राप्त करने के लिए एक कर्मचारी की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। शिक्षकों के अनुसार, काफी देर तक इंतजार करने के बाद कर्मचारी भेजे जाने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
शिक्षकों ने कहा कि ज्ञापन अंततः स्वीकार कर लिया गया, लेकिन भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के दौरान पूर्व सूचना के आधार पर प्रशासन को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि आम लोगों और संगठनों को ज्ञापन सौंपने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

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