चंडीगढ़: हरियाणा में प्रस्तावित ‘नमो सिटी’ को आकार देने की दिशा में सरकार ने जमीन जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। झज्जर, सोनीपत और रोहतक जिलों के संबंधित इलाकों में करीब 9000 एकड़ जमीन का लैंड बैंक (भूमि का भंडार) तैयार करने की योजना है। इसके लिए इच्छुक भू-मालिकों से ई-भूमि पोर्टल के जरिए जमीन की पेशकश मांगी गई है।

भू-मालिक पोर्टल पर अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी के साथ उस कीमत का भी उल्लेख कर सकेंगे, जिस पर वे जमीन सरकार को देना चाहते हैं। इसके लिए 31 अक्टूबर तक का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद जमीन की उपलब्धता और भू-मालिकों की ओर से सामने आने वाली अपेक्षित कीमतों के आधार पर परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है।

प्रस्तावित ‘नमो सिटी’ को भविष्य के नियोजित शहरी विस्तार के तौर पर विकसित करने की परिकल्पना है। इसमें आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ रोजगार, परिवहन और नागरिक सुविधाओं को एक ही शहरी ढांचे में जोड़ने की योजना बताई जा रही है। सेमी-ग्रीनफील्ड (आंशिक रूप से नए सिरे से विकसित होने वाला क्षेत्र) और टीओडी (ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट) आधारित मिक्स्ड-यूज विकास मॉडल के जरिए शहर को विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।

शहर में मनोरंजन से लेकर शिक्षा तक की सुविधाएं

योजना में सिर्फ आवास और व्यावसायिक क्षेत्र ही नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए कई तरह की सार्वजनिक सुविधाओं को भी जगह देने की परिकल्पना है। पिकनिक स्पॉट और लेक जैसे मनोरंजन स्थल विकसित किए जा सकते हैं। इसके अलावा जू, म्यूजियम, आधुनिक लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाओं को भी शहरी डिजाइन का हिस्सा बनाए जाने की योजना है।

शहर के भीतर वॉकिंग और साइकिल ट्रैक, हरित क्षेत्र और बेहतर पब्लिक स्पेस विकसित करने पर भी जोर रहने की संभावना है। इसका उद्देश्य ऐसा शहरी वातावरण तैयार करना है, जहां लोगों को मनोरंजन, शिक्षा, संस्कृति, खेल और रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।

दिल्ली-NCR के विस्तार से जुड़ी बड़ी योजना

प्रस्तावित परियोजना को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के भविष्य के नियोजित विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। परिवहन, आवास, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं को शुरुआती स्तर से एक साथ विकसित करने की अवधारणा के कारण परियोजना का दायरा केहरियाणावल नए आवासीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने की बात कही जा रही है।

हालांकि, फिलहाल परियोजना के सामने सबसे अहम चरण जमीन की उपलब्धता का है। करीब 9000 एकड़ का लैंड बैंक तैयार करने के लिए 31 अक्टूबर तक ई-भूमि पोर्टल पर कितने भू-मालिक अपनी जमीन की पेशकश करते हैं और किस कीमत की मांग रखते हैं, इस पर आगे की प्रक्रिया काफी हद तक निर्भर करेगी।

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