Tejashwi Yadav: पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कई कदमों और फैसलों पर रिकॉर्ड पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति या असहमति जताई है। ये आपत्तियां मुख्य तौर पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision), फॉर्म-6 में बदलाव, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम जोड़ने-हटाने या बहाल करने, और मतदाता डेटाबेस तक पहुंच जैसे मामलों से जुड़ी हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कई अहम फैसले बिना ठीक से सलाह मशविरा किए या आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए लिए गए। अब इस मामले पर बिहार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है।
‘ज्ञानेश कुमार ने मनमानी कर BJP को पहुंचाया फायदा’
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि, 𝟐𝟕 जून 𝟐𝟎𝟐𝟓 को बिहार चुनाव से चंद दिन पहले एकपक्षीय दोषपूर्ण 𝐒𝐈𝐑 शुरू करने पर हमने सर्वप्रथम देश को आगाह किया था। हमने 𝟏𝟓 से अधिक बार तार्किक रूप से तथ्यों व सबूतों के साथ दोषपूर्ण और द्वेषपूर्ण 𝐒𝐈𝐑 प्रक्रिया पर 𝐏𝐫𝐞𝐬𝐞𝐧𝐭𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧 देकर जनता और मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा था। वोट चोरी को उजागर करने के लिए सर्वप्रथम बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाली।
‘दो आयुक्तों ने 14 बार जताई निर्णयों पर जताई आपत्ति’
तीन चुनाव आयुक्तों में से दो आयुक्तों ने 𝟏𝟎 महीनों में 𝟏𝟒 बार चुनाव आयोग के निर्णयों व नीतियों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई, यहां तक की एक दिन में 𝟒 बार आपत्तियां दर्ज करा इनके निर्णयों को अनधिकृत और अवैध बताया लेकिन बहुमत को दरकिनार करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जबरन मनमानी की ताकि बीजेपी को फायदा पहुंचे। दो शीर्ष लोगों के अनैतिक, अवैधानिक कुकृत्यों एवं निर्देशों की पालना कर लोकतंत्र और संविधान खत्म करने पर आमादा ज्ञानेश कुमार को कोई फर्क़ नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें विश्वास दिलाया गया है, उन्हें बचा लिया जाएगा।
‘एक भी आपत्ति पर नहीं हुई सुनवाई’
तेजस्वी ने कहा कि, वोट चोरी को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने 𝐄𝐂 के संवैधानिक संस्था का मुखिया होने के नाते हर बार तमाम सवैधानिक परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और मर्यादाओं को तार-तार कर सबको गुमराह किया। उन्होंने कहा कि, बिहार चुनाव से पूर्व हमारा डेलीगेशन इनसे मिला, विपक्ष का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल मिला, प्रमाण दिए, दोषपूर्ण और द्वेषपूर्ण 𝐒𝐈𝐑 प्रक्रिया के साक्ष्य दिए, अनेक पत्र लिखे, मृत बताकर काटे गए मतदाताओं को जिंदा सुप्रीम कोर्ट में खड़ा किया, चुनावों में मतदान के दिन तक सरकार द्वारा मतदाताओं को 𝟒𝟏 हज़ार करोड़ की बड़ी धनराशि के वितरण अथवा बीजेपी शासित प्रदेशों के अधिकारियों को ऑब्ज़र्वर एवं उन राज्यों की पुलिस की चुनावी ड्यूटी तथा 𝐏𝐌 मोदी समेत बीजेपी नेताओं द्वारा आचार संहिता के सरेआम उल्लंघन पर अनेक बार आपत्तियां दर्ज कराई लेकिन कभी भी एक भी आपत्ति पर सुनवाई नहीं हुई।
हम हारे नहीं, हमें हराया गया- तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने अंत में कहा कि, मैंने पूर्व में भी कहा और निरंतर कह रहा हूं हमें तंत्र और यंत्र से चुनाव हराया गया। हम हारे नहीं हराया गया। बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और बंगाल इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। पूरी चुनाव प्रक्रिया अब 𝐄𝐲𝐞 𝐰𝐚𝐬𝐡 बनकर रह गयी है। अभी तो ऐसे खुलासों की शुरुआत हुई है। समय आने पर जो भी इन अनैतिक गैर-संवैधानिक कुकृत्यों में सम्मिलित रहे है वो ही इनकी पोल खोलेंगे। हमने भी बहुत कुछ संभाल कर रखा है, इंतज़ार करते रहिए।
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