Bihar News: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी पर सियासी घमासान मचा हुआ है। पीएम मोदी के इस बयान पर बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। तेजस्वी ने पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, प्रधानमंत्री को भाषा ही नहीं बल्कि पद की गरिमा का भी ख्याल रखना चाहिए।
पीएम मोदी को माफी मांगनी चाहिए- तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने कहा कि, जो भी व्यक्ति या वर्ग सरकार को सच्चाई दिखाता है, उसे तुरंत कोई न कोई ठप्पा लगा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि, भगवा नक्सलियों को शिक्षित, तर्कशील, कर्मशील, विवेकशील और चिंतनशील लोग हमेशा ही से नक्सल लगते है।
किसान आंदोलन करे तो उसे खालिस्तानी और आंदोलनजीवी कहा जाता है। सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों को Urban Naxal कहते है और अब Gen-Z के छात्र-छात्राओं व युवाओं “दिमागी नक्सल” बताना प्रधानमंत्री जी की वैचारिक दरिद्रता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री को भाषा ही नहीं बल्कि पद की गरिमा का भी ख्याल रखना चाहिए। तेजस्वी ने मांग की कि पीएम मोदी को इस बयान पर अपनी सफाई पेश करनी चाहिए और देश के युवाओं और छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
पीएम मोदी का बयान
दरअसल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कल 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि,जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ लड़ाई में देश को बड़ी सफलता मिली है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि ‘दिमागी नक्सल’ अभी भी मौजूद हैं और ऐसे लोग मौके की तलाश में रहते हैं। पीएम मोदी ने लोगों से ऐसे तत्वों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को इस चुनौती को हल्के में नहीं लेना चाहिए। पीएम मोदी के इस बयान को लेकर विपक्ष लगातार उनपर हमलावर है।
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