पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की लगातार अनुपस्थिति सदन में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। गुरुवार को कार्यवाही के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस बात को लेकर तीखी नोकझोक देखने को मिली। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया कि आखिर नेता प्रतिपक्ष कहां हैं और उनकी गैरमौजूदगी की आधिकारिक जानकारी सदन को क्यों नहीं दी गई।

​सदन को बताया जाए, कहां हैं तेजस्वी?

​विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने लोकतंत्र की गरिमा का हवाला देते हुए कहा कि सदन सर्वोपरि है। यदि नेता प्रतिपक्ष किसी व्यक्तिगत या अन्य कारण से सदन में उपस्थित नहीं हैं, तो उसकी विधिवत जानकारी सदन को दी जानी चाहिए।

  • ​पारदर्शिता की मांग: विजय सिन्हा ने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या तेजस्वी यादव अस्वस्थ हैं, किसी पारिवारिक वजह से बाहर हैं या फिर अन्य किसी कारण से सदन से दूर हैं।
  • ​बंधुआ मानसिकता पर वार: उन्होंने इस दौरान दो टूक शब्दों में यह भी कहा कि लोकतंत्र में बंधुआ मजदूर जैसी मानसिकता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए और जनता के प्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पारदर्शी रहना चाहिए।

​राजद का पलटवार: निशांत कुमार के ठिए पर सवाल

​सत्तापक्ष के हमलों का जवाब देते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक कुमार सर्वजीत ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए पूछ लिया कि आखिर निशांत कुमार कहां हैं, और बिहार की जनता यह भी जानना चाहती है।
​इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि निशांत कुमार सदन के सदस्य नहीं हैं, जबकि तेजस्वी यादव एक संवैधानिक पद यानी नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इसलिए दोनों मामलों में अंतर है। अध्यक्ष ने राजद विधायक से यह भी कहा कि यदि उन्हें जानकारी है, तो वे सदन को बताएं कि तेजस्वी यादव कहां हैं। इसके जवाब में कुमार सर्वजीत ने बताया कि पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तबीयत ठीक नहीं है और दिल्ली में उनका इलाज चल रहा है, जिसकी देखभाल के चलते तेजस्वी यादव भी दिल्ली में ही मौजूद हैं।

​यूरोप दौरे से लेकर मानसून सत्र की दूरी

​राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तेजस्वी यादव हाल ही में लगभग 10 दिनों के यूरोप दौरे पर थे। उनके विदेश दौरे के कारण ही राजद का 30वां स्थापना दिवस निर्धारित तिथि 5 जुलाई के बजाय 5 दिन पहले यानी 1 जुलाई को ही मनाना पड़ गया था। इतना ही नहीं, 5 जुलाई को उन्होंने यूरोप से ही वर्चुअल माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित भी किया था।
​इसके बाद, जब 20 जुलाई से बिहार विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हुआ, तब से लेकर अब तक वह सदन की किसी भी बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। मानसून सत्र का अंतिम दिन नजदीक होने के बावजूद उनकी अनुपस्थिति को लेकर सत्तापक्ष लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है, जिससे राज्य की राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।