सुशील सलाम, कांकेर। “हरा सोना” कहे जाने वाले तेंदूपत्ता की बस्तर में खरीदी शुरू हो गई है. हितग्राही तेंदूपत्ता तोड़ाई कर संग्रहण केंद्रों में बेच रहे हैं. लेकिन बेमौसम बारिश ने मुसीबत पैदा कर दी है. बारिश से तेंदूपत्ता की हजारों गड्डियां भीग गई है. यही नहीं भीगे हुए तेंदूपत्ता के बंडलों में नमी के कारण दीमक लग रहे हैं, जिससे शासन को बड़ा नुकसान हो सकता है.

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कांकेर के इलाके में रोजाना मौसम में बदलाव हो रहा है. सुबह से शाम तक तेज धूप और शाम होते-होते आंधी और बारिश शुरू हो जा रही है. बीते 3 दिनों से चल रहे मौसम की इस आंखमिचौली का सीधा असर तेंदूपत्ता की तोड़ाई, खरीदी और उसकी गुणवत्ता पर पड़ रहा है. तेज हवा, बारिश और ओले से जहाँ तेंदूपत्ता के फटने का डर है, वहीं संग्रहण केंद्रों में सुखाने के लिए रखे गए तेंदूपत्ता के बंडल हवा से उड़ कर टूट रहे हैं. बारिश से बंडल भीग जा रहे है. नमी के कारण बंडलों में दीमक लगता जा रहा है.

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लल्लूराम डॉट कॉम की टीम जिला मुख्यालय से सटे ग्राम नवागांव के जिस खरीदी केंद्र में पहुंची, वहाँ तकरीबन 120 तेंदूपत्ता हितग्राही पंजीकृत हैं. यहाँ अब तक 60 हजार तेंदूपत्ता की खरीदी की जा चुकी है. लेकिन बारिश ने संग्रहण केंद्रों में रखे सभी हजारों तेंदूपत्ता के बंडलों को भीगा दिया है. नमी की वजह से दीमक लगने की शिकायतें आ रही है. अधिकतर पत्ते को बंडल में दीमक चढ़ता जा रहा है. पानी और नमी से पत्तों की गुणवत्ता भी खराब हो रही है, जिसे बेहतर तरीके से संरक्षित करने की आवश्यकता है.