चंडीगढ़। हाईकोर्ट ने मालेरकोटला जिला अस्पताल में आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) की सुविधा न होने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने इसे सिर्फ हैरान करने वाला नहीं, बल्कि चौंकाने वाला मामला करार दिया। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा है कि वह राज्य के जिला अस्पतालों में आईसीयू सुविधाओं की उपलब्धता पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि मालेरकोटला जिला अस्पताल में कोई आईसीयू नहीं है, जबकि यह रेफरल अस्पताल है। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को सिर्फ मालेरकोटला तक सीमित न रखते हुए अन्य जिलों के सिविल अस्पतालों तक बढ़ा दिया।
हाईकोर्ट ने जिला स्तर पर आवश्यक जांच सुविधाओं की कमी पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि जब हर जिला अस्पताल इतनी बड़ी आबादी को सेवाएं देता है तो वहां सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन को अनिवार्य क्यों न बनाया जाए। राज्य सरकार द्वारा पेश आंकड़ों का हवाला देकर बेंच ने कहा कि पंजाब के 23 जिलों में से सिर्फ 6 जिलों में ही एमआरआई मशीनें उपलब्ध हैं। कोर्ट ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, क्योंकि जिला अस्पतालों पर आपातकालीन और रेफरल मामलों का बड़ा बोझ होता है।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अतिरिक्त हलफनामा ऐसे जूनियर अफसर द्वारा दाखिल किया गया है, जिस पर जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगला हलफनामा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव द्वारा ही दाखिल किया जाए। कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में याचिकाकर्ता की उस दलील को दर्ज किया, जिसमें कहा गया कि मालेरकोटला अस्पताल में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड का उल्लंघन हो रहा है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सिविल अस्पताल में सीटी और एमआरआई सुविधाएं आउटसोर्स करने के फैसले पर भी सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि राज्य का यह दायित्व है कि वह बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए।
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