नवी शर्मा, हांसी। हरियाणा में गेहूं की खरीद प्रक्रिया और भुगतान नियमों को लेकर किसान और आढ़ती लामबंद हो गए हैं। वर्तमान में प्रदेश में गेहूं के गोदाम पहुंचने (लिफ्टिंग) के 72 घंटे बाद भुगतान का नियम है, लेकिन उठान की कछुआ चाल के कारण हजारों किसानों की पेमेंट अटक गई है।
इसी के विरोध में हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन और भारतीय किसान मजदूर यूनियन ने संयुक्त रूप से मांग की है कि लिफ्टिंग आधारित प्रक्रिया को बदलकर पंजाब की तर्ज पर ‘जे-फार्म’ कटते ही भुगतान की व्यवस्था लागू की जाए।

इस संकट के समाधान के लिए हांसी में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 20 अप्रैल को पूरे हरियाणा की मार्केट कमेटी के दफ्तरों पर सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक तालाबंदी की जाएगी।
भारतीय किसान मजदूर यूनियन के प्रधान सुरेश कोथ और आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामअवतार तायल ने सरकार पर आरोप लगाया कि अनाज मंडी के खरीद पोर्टल को निजी एजेंसियों को ठेके पर देकर व्यवस्था को पंगु बना दिया गया है।
पोर्टल में तकनीकी खामियों और फिजिकल वेरिफिकेशन (अंगूठा लगाने व आंखें स्कैन करने) जैसी जटिलताओं के कारण किसान अपनी ही फसल बेचने के लिए परेशान हो रहे हैं।

आढ़ती नेताओं का कहना है कि मंडियों में लाखों क्विंटल गेहूं की आवक हो चुकी है, लेकिन उठान न होने से मंडियां पट गई हैं। सरकार ने विरोध के बाद मैनुअल गेट पास के आदेश तो दिए, लेकिन जब तक पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री नहीं होगी, किसानों के खातों में पैसा नहीं पहुंचेगा।

किसान नेता धर्मपाल बडाला ने चेतावनी दी है कि 20 अप्रैल की तालाबंदी केवल एक सांकेतिक चेतावनी है। यदि सरकार ने जे-फार्म के आधार पर सीधा भुगतान और पोर्टल की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
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