रोहित कश्यप, मुंगेली। प्रशासनिक व्यवस्था में कामकाज को समय पर पूरा कराने के लिए अधिकारियों को कभी डांट-फटकार का सामना करना पड़ता है तो कभी कड़े निर्देशों और कार्रवाई का डंडा चलता है, लेकिन मुंगेली में कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने समय-सीमा की जवाबदेही तय करने एक अलग तरीका अपनाया है। यहां फाइल निर्धारित समय में पूरी नहीं हुई तो सिर्फ जवाब-तलब नहीं, बल्कि अर्थदंड भी लगाया जा रहा है। इस व्यवस्था का सबसे खास पहलू यह है कि जब कलेक्टर कार्यालय की अपनी फाइलें समय-सीमा से बाहर हुईं तो कलेक्टर ने भी खुद पर 500 रुपये का अर्थदंड लगाया और राशि जमा की।
‘नियम सबके लिए बराबर’ का संदेश
कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के इस कदम को अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्पष्ट जवाबदेही के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। कलेक्टर कार्यालय से संबंधित फाइल का काम निर्धारित समय-सीमा में पूरा नहीं हो पाया था। इसके बाद कलेक्टर ने स्वयं को भी उसी व्यवस्था के दायरे में रखते हुए अर्थदंड लगाया। यानी व्यवस्था ऐसी कि जिम्मेदारी किसी भी स्तर की हो, निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा नहीं होने पर जवाबदेही तय होगी। कलेक्टर का खुद पर अर्थदंड लगाना इसी व्यवस्था को व्यवहार में लागू करने का उदाहरण बना है।


प्रति फाइल 500 रुपये का अर्थदंड
जिला प्रशासन में निर्धारित समय-सीमा में फाइल या प्रकरण का निराकरण नहीं होने पर प्रति फाइल 500 रुपये का अर्थदंड लगाए जाने की व्यवस्था लागू की गई है। समय-सीमा में काम पूरा नहीं करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी इसके तहत कार्रवाई की जा रही है। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में होने वाली अनावश्यक देरी को कम करना और फाइलों के निराकरण में तेजी लाना है।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत तय है समय-सीमा
दरअसल, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अलग-अलग शासकीय सेवाओं और कार्यों के निराकरण के लिए निर्धारित समय-सीमा तय की गई है। कार्यालयों में इससे संबंधित चार्ट भी लगाए जाते हैं, ताकि आम लोगों को यह जानकारी मिल सके कि उनका आवेदन या काम कितने समय में पूरा होना चाहिएl ऐसे में तय समय-सीमा के भीतर काम पूरा नहीं होने पर जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को सेवाएं समय पर उपलब्ध कराना है।
कलेक्टर ने खुद पर भी लागू किया नियम
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा कलेक्टर द्वारा खुद पर अर्थदंड लगाने को लेकर है। सामान्य तौर पर किसी अधीनस्थ अधिकारी या कर्मचारी की फाइल लंबित होने पर उससे जवाब मांगा जाता है या नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। लेकिन यहां कलेक्टर कार्यालय की दो एक फाइल समय-सीमा से बाहर हुईं तो कलेक्टर ने खुद को भी जवाबदेही से अलग नहीं रखा।कलेक्टर की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सरकारी सेवा में नियम पद देखकर नहीं बदलने चाहिए। यदि कलेक्टर स्तर पर भी कोई कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं होता है, तो उन्हें भी उसी व्यवस्था के तहत अर्थदंड देना चाहिए।
जनता के काम में देरी रोकने की कोशिश
प्रशासन की इस पहल का सीधा संबंध आम लोगों से जुड़े कामों से है। सरकारी कार्यालयों में आवेदन, जनदर्शन तथा सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को इसमें विशेष फोकस किया गया है। इसके साथ ही प्रमाण-पत्र और विभिन्न सेवाओं से जुड़े प्रकरण निर्धारित समय में पूरे नहीं होने पर नागरिकों को अनावश्यक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में फाइलों के समयबद्ध निराकरण के साथ देरी होने पर आर्थिक दंड की व्यवस्था अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने का एक तरीका है। मुंगेली में कलेक्टर का खुद पर 500 रुपये का फाइन लगाना इसलिए भी खास है कि जिस नियम के तहत दूसरे अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है, उसी नियम को कलेक्टर ने अपने कार्यालय पर भी लागू किया है।
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