रायपुर। कृषि प्रधान राज्य छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना का मूल आधार किसान और खेती ही रही है। जब भी कोई सरकार किसानों के हितों को मध्य में रखकर योजनाएं बनाती है तो उसका सीधा प्रभाव प्रदेश के विकास और समृद्धि पर दिखाई देता है। आरम्भ से ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार ने जिस तरह किसानों की चिंता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है वह न केवल सराहनीय रही है बल्कि एक वर्तमान में आदर्श शासन मॉडल के रूप में उभर कर सामने आ रहा है।

योजना, संवेदनशीलता और सशक्त निर्णयों से बदल रही छत्तीसगढ़ की कृषि तस्वीर

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही इस दिशा में सरकार की सक्रियता यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय केवल योजनाओं की घोषणा से आगे उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस वर्ष संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि और मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया कि किसानों का हित सर्वोपरि है। संकट आने से पहले ही समाधान की दिशा में कार्य करने की दूरदर्शिता उनके संवेदनशील नेतृत्व का परिचायक है।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा निर्देशित किया गया कि किसानों को खाद और बीज की कोई कमी न हो उनका यह निर्णय सीधे तौर पर किसानों के आत्मविश्वास को मजबूत करने वाला साबित हो रहा है। पुराना अनुभव यही रहा है कि समय पर उर्वरक और बीज की उपलब्धता न होने के कारण किसानों को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ता है लेकिन छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने पहले से ही तैयारी कर यह साबित कर दिया है कि वह किसान हितों को लेकर पूरी तरह सजग है।

पारंपरिक तरीकों के साथ अपनाई जा रही कृषि की आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व की एक बड़ी ख़ासियत है कि वे कृषि में पारंपरिक तरीकों के अलावा आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देते हैं। किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाने के लिए उनके द्वारा अधिकारियों को दिया गया निर्देश यह दर्शाता है कि सरकार कृषि को एक उन्नत और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना चाहती है।

मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र सरकार से अतिरिक्त डीएपी उर्वरक की मांग करना इस दिशा में एक और उल्लेखनीय पहल साबित हुआ है। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से आग्रह के बाद छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन अतिरिक्त डीएपी मिलना न केवल मुख्यमंत्री की सक्रियता को दर्शाता है बल्कि उनके प्रभावी संवाद और समन्वय क्षमता को भी प्रमाणित करता है। इस प्रभावी कदम से यह सुनिश्चित हुआ है कि अब खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उर्वरक की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

आशा और आशंका दोनों के लिए तैयार है छत्तीसगढ़ की साय सरकार

राज्य में हुई पहली बारिश ने किसानों को आशान्वित किया और वे खेतों में बुआई के काम से लग गए, राज्य में कृषि गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली। ऐसे अनुकूल माहौल में किसानो के लिए सरकार का सहयोगी होना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राज्य में प्राकृतिक वर्षा के सामान्य से कम होने की स्थिति के लिए भी वैकल्पिक रणनीति तैयार कर रहे हैं। किसी भी राज्य के मुखिया की यही दूरदर्शिता किसी भी सफल नेतृत्व की पहचान होती है। फसल विविधीकरण, तकनीकी सलाह और संसाधनों की उपलब्धता पर अपना ध्यान केंद्रित कर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें वर्तमान और भविष्य दोनों की ही चिंता है। किसानों को जोखिम से बचाने और उनकी आय को स्थिर रखने के लिए भी यह कदम महत्वपूर्ण हैं।

कृषि मजदूरों को आत्मनिर्भर बनाने वाली एक और कारगर योजना ‘भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’

प्रदेश के मुख्यमंत्री साय की सबसे प्रभावशाली योजनाओं में से एक ‘भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ है, जिसने समाज के उस वर्ग को संबल प्रदान किया है, जो सदा से विकास की मुख्यधारा से दूर रहा। इस योजना के माध्यम से भूमिहीन कृषि मजदूरों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है।

‘कृषक उन्नति योजना’ से निहाल हुए प्रदेश के किसान

‘कृषक उन्नति योजना’ भी राज्य के किसानों की तकदीर बदलने वाली साबित हो रही है। देश में सबसे अधिक मात्रा में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी कर छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने इस बात का प्रमाण दिया है कि वह किसानों के श्रम का उचित मूल्य देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी का लाभ पाकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शासकीय योजनाओं के सहयोग से खेती एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित हो रही है जिससे युवा भी कृषि की ओर आकर्षित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इस दृष्टिकोण में योजनाओं, संसाधनों और तकनीक का संतुलित समावेश है जो छत्तीसगढ़ को कृषि क्षेत्र में एक नई ऊँचाई पर ले जाने की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की कार्यशैली में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

डीएपी वितरण से बढ़ रहा किसानों का विश्वास

सरकार द्वारा डीएपी के पारदर्शी और समयबद्ध वितरण के निर्देश दिए हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी की संभावना समाप्त हो। राज्य की साय सरकार का यह कदम किसानों के विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को भी सुदृढ़ करता है।

आज जब पूरा देश कृषि क्षेत्र में नई चुनौतियों का सामना कर रहा है ऐसे समय में भी छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनने की स्थिति में है। किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक ऐसा सशक्त ढांचा तैयार किया है जो वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ भविष्य की संभावनाओं को भी सुरक्षित करने वाला है। पर्याप्त खाद-बीज की उपलब्धता, आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन और किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के पीछे सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि प्रदेश का प्रत्येक किसान आत्मविश्वास के साथ खेती करे और समृद्धि की नई इबारत लिखे।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज उस दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समृद्धि के साधक भी बन रहे हैं। प्रदेश का यह बदलाव किसानों के आर्थिक, सामाजिक और मानसिक विकास का स्पष्ट संकेत है।

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