आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत बस्तर संभाग के नगरीय निकाय क्षेत्रों में संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि डॉक्टरों की कमी, सीमित जांच सुविधाओं और आवश्यक दवाओं के अभाव के बावजूद योजना का संचालन कागजों में संतोषजनक दिखाया जा रहा है, जबकि हितग्राहियों को अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।

जुगाड़ के डॉक्टरों से चल रहा काम

दरअसल, इस योजना का उद्देश्य शहरी स्लम क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उनके घर के समीप निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश मोबाइल मेडिकल यूनिट में नियमित चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। कई स्थानों पर अस्थायी अथवा वैकल्पिक डॉक्टरों के माध्यम से कैंप पूरे किए जा रहे हैं। इससे मरीजों के उपचार में निरंतरता नहीं रह पाती और गंभीर अथवा दीर्घकालिक बीमारियों का समुचित फॉलो-अप भी प्रभावित होता है।

सीबीसी मशीन खराब

बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों में इस योजना का संचालन भव्या हेल्थ सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। आरोप है कि अनुबंध के अनुरूप सभी संसाधन उपलब्ध कराने में कंपनी सफल नहीं हो पा रही है। जानकारी के अनुसार, मोबाइल मेडिकल यूनिट में 41 प्रकार की जांच का प्रावधान है, लेकिन इस यूनिट में केवल सीमित जांच ही हो रही हैं। कई आवश्यक जांच के लिए मरीजों को बाहरी लैब में भेजा जाता है, जिससे रिपोर्ट मिलने में देरी होती है और उपचार प्रभावित होता है। लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने अपनी पड़ताल में पाया कि एक यूनिट में सीबीसी मशीन खराब है, जिससे जांच नहीं हो पा रही है और मरीजों को परेशानी हो रही है।

‘काम आधा-अधूरा, भुगतान पूरा’ का आरोप

इस योजना से जुड़े जानकारों का आरोप है कि संचालन करने वाली कंपनी की मासिक टीपीए (TPA) ऑडिट रिपोर्ट में लगातार कई कमियां सामने आती रही हैं। इसके बावजूद इन कमियों को दूर कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि कंपनी को अनुबंध के अनुसार हर महीने पूरा भुगतान किया जा रहा है, जबकि हितग्राहियों को अधूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।

यूनिट में संसाधनों की कमी

गौरतलब है कि अधिकांश मोबाइल मेडिकल यूनिट में चिकित्सकों की कमी, मूलभूत सुविधाओं का अभाव और अन्य व्यवस्थागत समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीजों की संख्या लगातार घट रही है और लोगों का इस योजना पर विश्वास भी कम होता जा रहा है। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रभावी निगरानी और अनुबंध की शर्तों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित नहीं कराया जा रहा है, जिसके कारण व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।

इस मामले में नोडल अधिकारी हेमंत श्रीवास से जब लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने संपर्क करना चाहा, तो उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही 8 घंटे बीतने के बाद अधिकारी का कोई फोन आया।

अब देखने वाली बात होगी कि लल्लूराम डॉट कॉम की इस खबर के बाद व्यवस्था सुधरती है या फिर अधिकारी फोन की तरह इस मुद्दे को भी नजरअंदाज कर देते हैं।

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H