अंबाला: हरियाणा के अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी की आशंका से जुड़ी कार्रवाई में 10 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। आरोप है कि इन बच्चों को बिहार के कटिहार से हरियाणा और पंजाब की राइस मिलों में मजदूरी कराने के लिए ले जाया जा रहा था। कर्मभूमि एक्सप्रेस से अंबाला पहुंचे बच्चों को जीआरपी (Government Railway Police), आरपीएफ (Railway Protection Force) और जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एलायंस की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अपने संरक्षण में लिया।

जानकारी के मुताबिक, बच्चों को अलग-अलग स्थानों पर काम के लिए भेजे जाने की तैयारी थी। पूछताछ में बच्चों ने बताया कि उन्हें दो हजार रुपये एडवांस देने के साथ हर महीने करीब 12 से 15 हजार रुपये मजदूरी का भरोसा दिया गया था। योजना के तहत तीन बच्चों को करनाल के तरावड़ी और सात बच्चों को पंजाब के लुधियाना व अमृतसर की राइस मिलों में भेजा जाना था।

जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एलायंस के प्रधान परमजीत सिंह बडोला के अनुसार, टीम को पहले से सूचना मिली थी कि कुछ बच्चों को राइस मिलों में काम कराने के लिए बाहर ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी दी गई और अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ाई गई। इसके बाद कर्मभूमि एक्सप्रेस में बच्चों की पहचान कर उन्हें रेस्क्यू किया गया।

बच्चों को सुरक्षित निकालने के बाद उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद सभी को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) अंबाला के समक्ष पेश किया गया। समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों को ओपन शेल्टर होम भेज दिया गया, जहां उनकी देखभाल और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (मानव तस्करी रोधी इकाई) की टीम भी सूचना मिलते ही सक्रिय हो गई थी। एएसआई राजतिलक ने बताया कि बच्चों को मजदूरी के लिए बाहर ले जाने से संबंधित सूचना मिलने पर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे स्थानों पर जांच की जाती है। इसी तरह की सूचना के आधार पर अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर कार्रवाई की गई और कर्मभूमि एक्सप्रेस से बच्चों को रेस्क्यू किया गया।

पूरे मामले में बच्चों को किसके माध्यम से हरियाणा और पंजाब ले जाया जा रहा था और उन्हें काम पर लगाने की व्यवस्था कौन कर रहा था, इसे लेकर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। फिलहाल सभी बच्चों को संरक्षण में लेकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।