चंडीगढ़। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की जेल के अंदर से दिए गए कथित इंटरव्यू को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए है। कोर्ट ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि अपराधियों का खुलेआम महिमामंडित करना और गैंगस्टर संस्कृति को बढ़ावा देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिनदहाड़े हत्याएं, फिरौती की मांग और अपराध को ग्लोरिफाई करना अब आम हो गया है, जो आम जनता में कानून के प्रति डर खत्म कर रहा है।
सुनवाई में पंजाब के डीजीपी गौरव यादव खुद कोर्ट में पेश हुए। जस्टिस की बेंच ने उनसे साफ कहा- कि आप समझ सकते हैं कि आपको व्यक्तिगत रूप से यहां क्यों तलब किया गया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस मौजूदगी के बावजूद हजारों लोगों के सामने शूटर हत्या करके फरार हो जाते हैं, फिर इंटरनेट पर इन अपराधों को महिमामंडित किया जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुनवाई व्यापक जनहित में हो रही है ताकि पंजाब के आम लोगों का कानून पर भरोसा कायम रहे और राज्य को गैंगस्टर स्टेट की छवि न मिले। कोर्ट ने कहा कि अपराध और अपराधियों को ग्लोरिफाई करने से युवा पीढ़ी प्रभावित हो रही है, यह चिंताजनक है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेशभर में वीआईपी सुरक्षा में तैनात पुलिस बल का पूरा ब्योरा भी मांगा। कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी अगर किसी इलाके में पुलिस मौजूदगी के बावजूद हत्या होती है और आरोपी फरार हो जाते हैं, तो संबंधित एसएसपी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

डीजीपी ने बताए कार्रवाई के आंकड़े
डीजीपी गौरव यादव ने कोर्ट को बताया कि ऑपरेशन प्रहार के तहत अब तक करीब 3000 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। पुलिस की मॉडर्नाइजेशन पर 297 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। राज्य में 88 हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं और 6000 नई भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं। गैंगस्टरों को महिमामंडित करने वाले हजारों वीडियो सोशल मीडिया से हटवाए जा चुके हैं।
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