अजय सैनी, भिवानी। वर्ष 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान समाज में पैदा हुए राजनीतिक तनाव पर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के भिवानी जिला प्रधान कुलदीप फौगाट ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों का हवाला देते हुए सवर्ण संगठनों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। फौगाट ने कहा कि जिस जाट समाज को ’35 बनाम 1′ का नारा देकर समाज का दुश्मन बनाकर पेश किया गया था, संकट के समय आज वही संगठन जाटों से समर्थन की गुहार लगा रहे हैं।

’35 बनाम 1′ के नारे से समाज को बांटने की हुई थी साजिश

जानकारी के मुताबिक, कुलदीप फौगाट ने फरवरी 2016 के आरक्षण आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि जाट समुदाय ने अपने जायज लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल होने के लिए शांतिपूर्ण कदम उठाया था। यह खेती-किसानी के संकट और नौकरियों की कमी के चलते अस्तित्व की लड़ाई थी। हालांकि, तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व और कुछ संगठनों ने ’35 बिरादरी संघर्ष समिति’ बनाकर समाज को जाति के आधार पर बांटने की साजिश रची और जाटों को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया।

31 युवाओं की मौत और मुकदमों पर मौन थे संगठन

जाट संघर्ष समिति के प्रधान ने आरोप लगाया कि 2016 के आंदोलन में लगभग 31 निर्दोष जाट युवाओं की जान चली गई थी और हजारों युवाओं पर मुकदमे दर्ज कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि जब युवाओं के भविष्य पर संकट था और जाट समाज कठिन दौर से गुजर रहा था, तब किसी भी सवर्ण संगठन या 35 बिरादरी के पैरोकारों ने मदद की हाथ नहीं बढ़ाया, बल्कि उनके घावों पर नमक छिड़कने का काम किया। उस कठिन समय में ये सभी संगठन पूरी तरह मूकदर्शक बने रहे।

यूजीसी विवाद और नूंह हिंसा के समय मांगी गई मदद

फौगाट ने कहा कि आज समय का चक्र बदल चुका है और जब दूसरे वर्गों के हितों पर बात आ रही है, तो उन्हें जाट समाज की ताकत का अहसास हो रहा है। हाल ही में यूजीसी नियमों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सवर्ण समाज के नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया से जाटों से साथ देने की अपील की जा रही है। इसी तरह 31 जुलाई 2023 को नूंह (मेवात) में वीएचपी और बजरंग दल की ब्रजमंडल यात्रा के दौरान भड़के दंगों के समय भी हिंदू संगठनों ने मेव समुदाय के खिलाफ जाटों से समर्थन मांगा था।

‘समर्थन चाहिए तो 2016 के दुष्प्रचार पर करें आत्ममंथन’

कुलदीप फौगाट ने स्पष्ट किया कि जाट समाज हरियाणा में हमेशा से 36 बिरादरी के आपसी भाईचारे का समर्थक रहा है, लेकिन समाज के स्वाभिमान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सामान्य या सवर्ण समाज को जाटों के समर्थन की जरूरत है, तो उन्हें सबसे पहले वर्ष 2016 में फैलाए गए दुष्प्रचार और ’35 बनाम 1′ के नैरेटिव पर सार्वजनिक रूप से आत्ममंथन करना होगा।

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