प्रतीक शर्मा, लोरमी। मुंगेली जिले में नट समाज के बच्चों के सामने बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। स्थायी जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण समाज के सैकड़ों बच्चों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ‘छत्तीसगढ़ नट समाज विकास सेवा समिति सुरदा’ ने छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री अरुण साव के नाम पत्र लिखकर समस्या के जल्द निराकरण की गुहार लगाई है।

क्या है पूरा मामला ?

समिति द्वारा उपमुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र के अनुसार, मुंगेली जिले को छोड़कर राज्य के अन्य जिलों में नट समाज के बच्चों का स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनाया जा रहा है, लेकिन मुंगेली जिले में अधिकारियों द्वारा प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है और ‘मिशल बंदोबस्त’ रिकॉर्ड की मांग की जा रही है।

‘मिशल बंदोबस्त’ बना सबसे बड़ी रुकावट

नट समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनके पूर्वज भूमिहीन थे और उनके पास पूर्वकाल में जमीन नहीं थी। ऐसी स्थिति में राजस्व रिकॉर्ड से ‘मिशल बंदोबस्त’ प्रस्तुत करना उनके लिए पूरी तरह असंभव है। मिशल बंदोबस्त न होने के कारण अधिकारियों द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने से मना किया जा रहा है।

पूर्व सरकार के आदेश का दिया हवाला

पत्र में उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में भी जब ऐसी समस्या उत्पन्न हुई थी, तब शासन ने एक विशेष आदेश जारी किया था। उस आदेश के तहत ‘ग्राम पंचायत के प्रस्ताव’ के आधार पर नट समाज के लोगों का जाति प्रमाण पत्र बनाया जाने लगा था। हालांकि, अब इस व्यवस्था को पुनः बंद कर दिया गया है।

शिक्षा और सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे बच्चे

समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि नट समाज पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। समाज में भिक्षावृत्ति और अशिक्षा की समस्या व्याप्त है। जब समाज के लोग जागरूकता लाकर अपने बच्चों को अनिवार्य शिक्षा की ओर भेज रहे हैं, तब जाति प्रमाण पत्र न बनना उनके सपनों पर पानी फेर रहा है। प्रमाण पत्र के अभाव में न तो बच्चों को स्कूलों में दाखिला/छात्रवृत्ति मिल पा रही है और न ही वे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं।

समिति ने की यह मांग

छत्तीसगढ़ नट समाज विकास सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार नट और प्रदेश सचिव दिलेश कुमार नट के नेतृत्व में नट समाज के प्रतिनिधियों ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव से करबद्ध प्रार्थना की है कि इस विकट परिस्थिति को देखते हुए पूर्व की भांति ग्राम पंचायत प्रस्ताव या अन्य व्यावहारिक व्यवस्था के तहत स्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया जाए, ताकि बच्चों का भविष्य संवर सके।

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