Dharm Desk: संतान के कल्याण, सुख-समृद्धि, दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से हिंदू धर्म में कई व्रत किए जाते है, इन्हीं में संतान सप्तमी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य और सुखी जीवन की कामना से व्रत रखती है। कई जगह पति-पत्नी दोनों मिलकर इस व्रत को करते हैं। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
संतान सप्तमी व्रत कब रखा जाएगा
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल सप्तमी तिथि 17 सितंबर को सुबह 10.48 मिनट से शुरू होगी। 18 सितंबर को दोपहर 1.01 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर संतान सप्तमी का व्रत 18 सितंबर शुक्रवार को रखा जाएगा।
संतान सप्तमी का क्या है महत्व?
संतान सप्तमी का व्रत संतान के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करने से बच्चे पर आने वाली बाधाएं दूर होती है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपती भी इस व्रत को करते हैंl। परिवार की खुशहाली और संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी यह व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है।
कैसे करें संतान सप्तमी की पूजा
संतान सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर के पूजा स्थान की सफाई करे। इसके बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करे। भगवान गणेश का भी पूजन करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लेंl भगवन शिव-पार्वती को फूल, अक्षत, रोली, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर संतान सप्तमी की व्रत कथा का पाठ करें।पूजा के अंत में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेशजी की आरती करें और संतान के सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की प्रार्थना कर।
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