Dharm Desk – हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान इसतमाल होने वाली कई छोटी-छोटी वस्तुओं का बहुत महत्व बताया गया है। लौंग भी इन्हीं में से एक है। धार्मिक परंपरा में लौंग का संबंध नकारात्मकता दूर करने और पूजा को ओर अधिक परभावी बनाने वाले उपायों से जोड़ा जाता है। खासकर बजरंगबली की साधना में लौंग से जुड़े कुछ प्रयोग बताए गए हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए इन उपायों से मनुष्य को मानसिक मजबूती मिलती है और रुके हुए कार्यों के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

लौंग के इन 4 उपायों से दूर होगी परेशानियां

  1. अगर कोई जरूरी काम लंबे समय से अटका हुआ है या किसी नए काम की शुरुआत करने जा रहे हैं।तो एक नींबू लेकर उसमें चार लौंग लगा दें। इसके बाद बजरंगबली को याद करते हुए ‘ॐ श्री हनुमते नमः’ मंत्र का 21 बार जाप करें। मंत्र जाप के बाद नींबू को अपने चारों ओर घुमाएं और श्रीराम का नाम लेते हुए उसे पश्चिम दिशा की ओर बाहर फेंक दें। इससे रुके हुए कार्य पूरे हो जाते हैं।यह उपाय धार्मिक मान्यता के आधार पर किया जाता है।
  2. जिन घरों में छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव या विवाद बना रहता है वहां भी लौंग से जुड़ा एक उपाय किया जाता है। सुबह के समय देसी कपूर के साथ एक जोड़ी लौंग जलाकर पूरे घर में धूप दिखाएं। पूजा के समय बजरंगबली का स्मरण करें। माना जाता है कि इससे घर का माहौल सकारात्मक बनाने में मदद मिलती है और मन को शांति मिलती है।
  3. किसी भी काम में लगातार रुकावटें आ रही हो तो घर में दाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेशजी का मूर्ति या प्रतिमा रख देना चाहिए। गणेशजी के सामने लौंग और सुपारी रखकर रोजाना पूजन करें। घर से बाहर काम पर निकलते समय पूजा में रखी लौंग में से एक लौंग अपने साथ रख लें इसे शुभ संकल्प के साथ किया जाता है।
  4. धन से जुड़ी समस्याओं के लिए भी लौंग का एक प्रयोग प्रचलित है। मंगलवार या शनिवार को कच्ची घानी के के तेल में दो लौंग डालकर बजरंगबली के समक्ष दिया या पूजा की व्यवस्था करें। इसके बाद बजरंगबली का ध्यान करते हुए अपनी परेशानी दूर होने की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता में इस उपाय को आर्थिक बाधाओं और आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जाता है।

श्रद्धा और सही कर्म भी जरूरी

लौंग से जुड़े ये सभी उपाय धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का हिस्सा हैं। इन्हें करते समय साफ मन श्रद्धा और संयम रखना जरूरी माना जाता है। साथ ही केवल किसी उपाय पर निर्भर रहने के बजाय अपने कर्म मेहनत और ववहहार को बेहतर बनाना भी उतना ही जरूरी है।