Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने NEET Paper Leak और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को अहंकार छोड़कर देश और प्रदेश के छात्रों की आवाज़ सुननी चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय विपक्ष को निशाना बना रही है।

अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के मालाखेड़ा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा लगातार दावा करते रहे कि राजस्थान में पेपर लीक नहीं हो रहे हैं। हालांकि, अब सामने आए मामलों ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि सीकर सहित अन्य स्थानों के नाम सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।

प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और छात्रों ने शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो, पेपर माफिया पर कार्रवाई करो और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो जैसे नारे लगाए। जूली ने आरोप लगाया कि NEET-2026 का प्रश्नपत्र राजस्थान में लीक हुआ, लेकिन राज्य सरकार ने 9 दिन तक एफआईआर दर्ज नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर घटना के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई।

तीन साल से लगातार लीक हो रहा है पेपर

नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि जांच में सामने आया है कि पिछले 3 वर्षों से लगातार NEET का प्रश्नपत्र लीक हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में करीब 90 पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं। उनके अनुसार इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।

भाजपा के पैदल मार्च पर भी साधा निशाना

बुधवार को जयपुर में भाजपा द्वारा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की ओर निकाले गए पैदल मार्च पर भी जूली ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे भाजपा यह भूल गई है कि वह सत्ता में है, विपक्ष में नहीं। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी छात्रों और जनता की समस्याओं का समाधान करना है। विपक्ष के खिलाफ सड़कों पर उतरना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। टीकाराम जूली ने दिल्ली में राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों का समर्थन करने वाले विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई करना उचित नहीं है।