NEET Paper Leak विवाद और देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा छात्रों के लंबे संघर्ष और एकजुटता की बड़ी जीत है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे जल्द स्वीकार करने की मांग की।

जूली ने कहा कि शिक्षा मंत्री को काफी पहले ही पद छोड़ देना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने कहा कि देर से ही सही, यह फैसला छात्रों के आंदोलन का परिणाम है।
छात्रों के संघर्ष का नतीजा बताया
टीकाराम जूली ने कहा कि यह केवल किसी एक मंत्री की नैतिक जिम्मेदारी का मामला नहीं है। यह पूरे देश के छात्रों की एकजुट आवाज की जीत है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष लगातार इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाता रहा। आखिरकार युवाओं के दबाव के कारण सरकार को फैसला लेना पड़ा।
लाठीचार्ज करने वालों पर कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस छोड़ी गई और पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, उन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
बीजेपी नेताओं के बयानों पर भी उठाए सवाल
टीकाराम जूली ने भाजपा के प्रदेश नेतृत्व और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों को भाड़े के टट्टू, कश्मीर से आए पत्थरबाज और विदेशी फंडिंग वाला बताकर उनका अपमान किया गया। उन्होंने पूछा कि अब ऐसे बयान देने वाले नेताओं पर भाजपा क्या कार्रवाई करेगी।
युवाओं की ताकत का एहसास हुआ
जूली ने कहा कि भारतीय राजनीति में यह दुर्लभ अवसर है, जब केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को युवाओं की ताकत का वास्तविक एहसास हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश का युवा आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाकर व्यवस्था में सुधार की मांग करता रहेगा।
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