(तिलोकचंद बरड़िया के जन्मदिन पर विशेष)

परंपरा और विश्वास की एक चमक सी कौंधती है जब कोई रायपुर के सदर बाज़ार की चर्चा करता है। सच यह भी है कि अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स के ज़िक्र के बिना सदर बाज़ार पर कोई बात नही हो सकती। कहा जाता है कि रायपुर के सदर बाजार की पहचान वहाँ के ज्वेलर्स से है और इस पहचान के केंद्र में जो नाम सबसे अव्वल आता है वह है अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स- एक ऐसा प्रतिष्ठान जो दुकान भी है और शहर की एक पहचान भी।

अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स को प्रतिष्ठा और परंपरा की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले, सरलता और सिद्धांतों के पर्याय, तिलोकचंद बरड़िया जी का आज 8 जून को जन्मदिन है। यह अवसर उस सोच, विश्वास और नैतिकता का उत्सव है जिसने व्यापार को सेवा का साधन बना दिया।

स्वर्गीय जसराज बरड़िया, जिन्होंने अपने परिश्रम और दूरदर्शिता से इस प्रतिष्ठान को खड़ा किया था। आज उनके बड़े पुत्र तिलोकचंद बरड़िया इस विरासत को न केवल संभाल रहे हैं बल्कि उसे आधुनिकता और नवाचार के साथ आगे भी बढ़ा रहे हैं। तिलोकचंद बरड़िया का व्यक्तित्व जितना सहज और मृदु है उतनी ही स्पष्ट और मजबूत उनकी व्यापारिक सोच भी है।

तिलोकचंद बरड़िया का मानना है कि “किसी भी व्यवसाय की सफलता का मूल आधार ईमानदारी, विश्वास और कथनी-करनी की समानता है।” ग्राहकों के साथ पारदर्शिता बनाए रखने का उनका सिद्धांत उन्हें भीड़ से अलग करता है। यही कारण है कि अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स केवल आभूषण खरीदने का स्थान नहीं बल्कि भरोसे का केंद्र बन गई है।

उनकी दूरदर्शिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण 23 कैरेट सोने की शुरुआत है। जब बाजार में केवल 22 और 24 कैरेट का प्रचलन था तब तिलोकचंद ने इनके बीच का संतुलन स्थापित करते हुए 23 कैरेट को प्रस्तुत किया था।23 कैरेट सोने की शुरुआत एक साहसिक और नवाचारी कदम साबित हुआ जिसने न केवल बाजार की दिशा बदली बल्कि ग्राहकों को एक नया विकल्प भी दिया। उनका यह प्रयोग आज व्यापक रूप से स्वीकार किया जा चुका है।

व्यवसाय में आधुनिकता और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ उन्होंने एम.एम.टी.सी. के माध्यम से विदेशों से सीधे सोना मंगाने की पहल की थी जो छत्तीसगढ़ में अपनी तरह की पहली यूनिट है। इसके अलावा दुबई में अनूप एक्सपोर्ट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अहमदाबाद में ब्रांच और देश के दूसरे शहरों में विस्तार की योजनाएँ उनकी प्रगति की निरंतर यात्रा का परिचय देती हैं।

आभूषणों की विविधता के अलावा अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स की विशेषता उसकी सुव्यवस्थित प्रस्तुति में भी है।ग्राहकों की सुविधा और पसंद के अनुरूप सोनाली, रुपाली, दामिनी और त्रिवेणी जैसे अलग-अलग फ्लोर बनाए गए हैं। 1957 से शुरू हुई यह यात्रा आज कई गुना विस्तार ले चुकी है और भविष्य में इसके और भी विस्तार की संभावनाएँ साफ़ दे रही है। इस सफलता के पीछे केवल तिलोकचंद बरड़िया की व्यापारिक कौशल के अलावा उनकी सामाजिक संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

एक सफल व्यवसायी होने के साथ ही साथ तिलोकचंद बरड़िया एक सजग सामाजिक व्यक्ति भी हैं। डी.के. अस्पताल में वर्षों से चल रहा प्याऊ, दादाबाड़ी और नगपुरा तीर्थ में अतिथि गृह, यह सब उनके समाज के प्रति समर्पण के उदाहरण हैं। तिलोकचंद बरड़िया का मानना है कि “जब समाज आगे बढ़ेगा, तभी हम भी आगे बढ़ेंगे।” उनकी यह सोच उन्हें एक व्यापारी से कहीं अधिक एक ज़िमेदार नागरिक बनाती है।

युवा पीढ़ी के प्रति भी तिलोकचंद बरड़िया का दृष्टिकोण प्रेरणादायक है क्यों की उनका मानना है कि आज के युवा मेहनती और जागरूक हैं लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसरों की कमी है। वे इसे भी समाज की नैतिक ज़िम्मेदारी मानते हैं कि वह युवाओं को यथासम्भव मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए।

तिलोकचंद बरड़िया का जीवन इस बात का संदेश है कि व्यापार केवल लाभ का साधन नहीं बल्कि विश्वास और मूल्यों का विस्तार भी हो सकता है। उनका मूल मंत्र भी यही है कि “शुद्धता का एक निश्चित मापदंड हर जगह आवश्यक है चाहे वह सोना हो या जीवन।”

उनके जन्मदिन के विशेष अवसर पर हम उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे निरंतर सफलता की नई ऊँचाइयों को छूते रहें और उनका जीवन यूँ ही समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहे।

संदीप अखिल, सलाहकार संपादक, न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम