Toxic Chemicals Found In Mother Milk: नवजात बच्चे के लिए मां का दूध अमृत का समान माना जाता है। डॉक्टर भी वजात बच्चे के लिए मां का दूध सबसे सुरक्षित और पौष्टिक आहार मानते हैं। लिहाजा 6 महीने तक नवजात बच्चों को मां का दूध पिलाने की ही सलाह देते हैं। हालांकि आज के आधुनिक युग में सबकुछ मिलावटी हो चुका है तो मां का दूध भी इससे कैसे अछूता रह रह सकता है। अमित के समान समझे जाना वाला मां का दूध अब जहर बनता जा रहा है। ये चौंकाने वाला खुलासा एक रिपोर्ट में हुआ है। लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय यानी केजीएमयू ( KGMU) के अध्ययन में मां के दूध में हानिकारक रसायनों और धातुओं की मौजूदगी पाई गई। अध्ययन में स्तनपान कराने वाली 100 महिलाओं के दूध के नमूनों की जांच की गई। जांच में दूध में एफलाटॉक्सिन एम1 (aflatoxin M1) और ओक्राटॉक्सिन (ochratoxin) समेत कई हानिकारक रसायन मिले। साथ ही भारी धातुएं भी मिली हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध के नमूनों में एफलाटॉक्सिन एम1, ओक्राटॉक्सिन समेत कई विषैले पदार्थ और कुछ भारी धातुएं मिली हैं। यह अध्ययन सितंबर में जर्नल ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

केजीएमयू के विष विज्ञान संस्थान में हुई जांच में 73 फीसदी नमूनों में एफलाटॉक्सिन एम1 और 96 फीसदी नमूनों में ओक्राटॉक्सिन पाया गया। इसके अलावा फफूंद से बनने वाले कुछ अन्य रसायन जियरालेनोन, अल्फा-जियरालेनोल और बीटा-जियरालेनोल भी नमूनों में पाए गए। क्रोमियम, मैगनीज, आर्सेनिक, कैडमियम और सीसा भी मिले। दूध के नमूनों में भारी धातुएं जैसे मैगनीज 49%, आर्सेनिक 42%, कैडमियम 34%, क्रोमियम 26% और सीसा 12% मिले। विशेषज्ञों ने कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर नियंत्रण की जरूरत बताई है।
नवजातों के किडनी, लीवर और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा
शोध के मुताबिक ये जहरीले पदार्थ भोजन और पर्यावरण से मां के शरीर में पहुंचकर स्तनदूध के जरिए नवजात तक जा सकते हैं। इससे किडनी, लीवर और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि फसलों में कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से ये रसायन भोजन श्रृंखला में प्रवेश कर रहे हैं. नियंत्रण और गाइडलाइन बनाने की जरूरत है।
फसलों में कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल को इसका कारण बताया
इस पर केजीएमयू में मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु ने कहा कि खाने-पीने की चीजों से ही जहरीला रसायन हमारे शरीर में जा रहा है। कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल पर नियंत्रण की जरूरत है। इसके लिए गाइडलाइन बनाई जानी चाहिए। वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रो. सीमा मल्होत्रा के अनुसार फसल उगाने में कीटनाशकों का इस्तेमाल काफी ज्यादा हो रहा है। महिलाओं के दूध में जहरीले रसायन और हानि पहुंचाने वाली धातुएं मिलने के पीछे सबसे बड़ी वजह यही है।
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