Business Desk – Trump-Iran Tension : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक कमोडिटी बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। 30 जुलाई को ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास और WTI क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था। कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन कच्चे तेल में आई तेजी ने भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।

जॉर्डन में अमेरिकी सेना पर हुए हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए और बड़े हमले की चेतावनी दी है। वहीं, ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण मजबूत करना चाहता है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद कमजोर
हाल के दिनों में जब कच्चे तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंची थीं, तब उम्मीद जताई जा रही थी कि यदि लंबे समय तक तेल सस्ता रहा तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम कम हो सकते हैं। लेकिन अब क्रूड ऑयल में फिर आई तेजी के बाद ऐसी संभावना कमजोर पड़ गई है।
युद्धविराम पर नहीं बन रही सहमति
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह तनाव लंबा खिंच सकता है। इसका असर सऊदी अरब तक भी पहुंच चुका है। वहीं, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में नाकाबंदी जारी रखी है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर भी दबाव बना हुआ है।
सिर्फ ईंधन नहीं, कई उद्योगों पर पड़ता है असर
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। जिन उद्योगों में कच्चे तेल का इस्तेमाल कच्चे माल (रॉ मटेरियल) के रूप में होता है, वहां उत्पादन लागत बढ़ जाती है। पेंट, प्लास्टिक, शैंपू, केमिकल और सड़क निर्माण जैसे कई सेक्टर महंगे हो जाते हैं।
महंगा ईंधन बढ़ाता है महंगाई
पेट्रोल और डीजल महंगे होने से सबसे पहले परिवहन लागत बढ़ती है। इसके बाद सब्जियों, फल, खाद्यान्न और रोजमर्रा के इस्तेमाल की दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ता है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की महंगाई पर भी पड़ सकता है।
वित्त मंत्रालय ने भी जताई चिंता
भारत के वित्त मंत्रालय ने भी बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों पर चिंता जताई है। मंत्रालय का कहना है कि यदि लंबे समय तक क्रूड ऑयल महंगा बना रहता है तो इसका असर देश के राजकोषीय घाटे और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर पड़ सकता है। हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत का निर्यात मजबूत बना हुआ है और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार देश की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है।


