भोपाल। “पुनर्वास केवल शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा और आत्मविश्वास का होना चाहिए।” इसी उद्देश्य के साथ राजधानी के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के ज्ञान विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन सीआरसी भोपाल द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के दिग्गजों शामिल हुए। इस कार्यक्रम में News 24 MP-CG और लल्लूराम डॉट कॉम ने मीडिया पार्टनर की भूमिका निभाई।
शोध और नवाचार का संगम
24 और 25 अप्रैल को आयोजित इस ‘पुनर्वास और नवीनीकरण’ विषयक सम्मेलन में विज्ञान और संवेदना का अनूठा संगम देखने को मिला। देशभर के विवि और मेडिकल कॉलेजों से आए विशेषज्ञों ने करीब 50 शोध पत्रों और पोस्टर्स के जरिए पुनर्वास की आधुनिक चुनौतियों और उनके समाधान पेश किए। विशेषज्ञों ने साफ किया कि जब तक दिव्यांगजन भीतर से मजबूत नहीं होंगे, बाहरी तकनीक का लाभ उन तक पूरी तरह नहीं पहुँच सकता।

मंच पर दिखी दिव्यांगों की प्रतिभा
सम्मेलन में केवल चर्चाएं ही नहीं हुईं, बल्कि सीआरसी भोपाल के विद्यार्थियों और दिव्यांगजनों ने अपनी प्रस्तुतियों से यह साबित कर दिया कि हौसले के आगे हर बाधा छोटी है। कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी ने आधुनिक सहायक उपकरणों और पुनर्वास की बदलती तस्वीर को बयां किया।

सम्मेलन में कई दिग्गज हुए शामिल
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. गोविंद भार्गव (कुलपति, JNCTPU) ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाते हैं। विशिष्ट अतिथि प्रो. पवन मिश्रा (DSW), डॉ. सुमित रॉय और डॉ. अजय शर्मा ने भी विचार साझा किए। सीआरसी के निदेशक डॉ. नरेंद्र कुमार ने सभी अतिथियों का ‘ग्रीन वेलकम’ करते हुए उन्हें पौधे भेंट किए। डॉ. पूनम सिंह ने दो दिनों के मंथन का सार प्रस्तुत करते हुए फीडबैक साझा किया। अंत में डॉ. इंदु भूषण कुमार ने सफल आयोजन के लिए सभी का आभार माना।

