हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार शीतकालीन सत्र से पहले UCC विधेयक को विधानसभा से पारित कराने का प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि एक देश में अलग-अलग कानूनों की व्यवस्था उचित नहीं है और अब मध्य प्रदेश भी उन राज्यों की कतार में शामिल होने जा रहा है जहां समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। 

समान नागरिक संहिता को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जब देश एक है, निशान एक है और संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, तो अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग कानून होने का कोई औचित्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में UCC लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि UCC को लेकर राज्य सरकार ने एक समिति का गठन कर दिया है। यह समिति समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव जुटा रही है। सरकार को लाखों लोगों के सुझाव प्राप्त हुए हैं और लगातार सुझाव आने का सिलसिला जारी है। 

मुख्यमंत्री के मुताबिक कई महत्वपूर्ण और सकारात्मक सुझाव मुस्लिम समाज के लोगों की ओर से भी मिले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभी सुझावों का गंभीरता से अध्ययन कर रही है। प्राप्त सुझावों के आधार पर मसौदा तैयार किया जाएगा ताकि ऐसा कानून बनाया जा सके जो सभी नागरिकों के लिए समान और न्यायपूर्ण हो। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग की भावनाओं और सुझावों का सम्मान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वही हमारे मुस्लिम भाई बहनों से भी अच्छे सुझाव आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार किसी भी स्थिति में शीतकालीन सत्र से पहले UCC विधेयक को विधानसभा में लाने और उसे पारित कराने का प्रयास करेगी। यदि ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश उन बड़े राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी।

गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता का मुद्दा लंबे समय से देशभर में चर्चा का विषय रहा है। इसे लेकर पक्ष और विपक्ष के अपने-अपने तर्क हैं। वहीं मध्य प्रदेश सरकार के इस ऐलान के बाद प्रदेश की राजनीति में भी UCC को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।तो मध्य प्रदेश में UCC को लेकर सरकार ने अपना इरादा स्पष्ट कर दिया है। अब सभी की नजरें समिति की रिपोर्ट और सरकार द्वारा तैयार किए जाने वाले विधेयक पर टिकी हैं। देखना होगा कि शीतकालीन सत्र से पहले सरकार इस महत्वपूर्ण कानून को विधानसभा से पारित कराने में कितनी सफल होती है।

सीएम के निर्देश पर शुरू हुआ सर्वे

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सर्वे शुरू हुआ है। गांव गांव से सुझाव लिए जा रहे हैं। नाम, धर्म, जिला, पता, मोबाइल नंबर समेत नागरिकों से जानकारी ली जा रही है। 12 सवालों पर ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब मांगे जा रहे हैं। अधिकांश सवाल महिलाओं के अधिकार, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े हुए हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को फॉर्म भरवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रतिदिन 10 फॉर्म भरवाने का लक्ष्य रखा गया है। हर नागरिक का सुझाव लेने की तैयारी है।फॉर्म भरवाने के बाद स्क्रीनशॉट अधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

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