प्रदीप मालवीय, उज्जैन। श्रावण माह के चौथे सोमवार पर उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी निकाली गई। भगवान महाकाल राजसी ठाठ बाट और लाव-लश्कर के साथ नगर भ्रमण पर निकले। बाबा की एक झलक पाने के लिए लोगो का हुजूम सडको पर देखा गया।

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मुख्य द्वार पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’; चार रूपों में दिए भक्तों को दर्शन

श्री महाकालेश्वर मंदिर से शाम 4 बजे शुरू हुई बाबा की सवारी नगर के प्रमुख मार्गो से होती हुई शिप्रा नदी पर पहुची। शिप्रा नदी के तट पर जल अभिषेक के बाद सवारी पुनः महाकाल मंदिर के लिए रवाना हुई। मान्यता है की भगवान महाकाल सवारी के रूप में अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते है। वहीँ अपने राजा की एक झलक पाने के लिए प्रजा भी घंटो तक सडक के किनारे इंतजार करती है।

शाम को सभामंडप में पूजन के बाद राजा महाकाल को चांदी की पालकी में बैठाकर मंदिर से बाहर लाया गया। मंदिर से निकलते ही महाकाल द्वार पर पुलिस बैंड औऱ सशस्त्र पुलिस दल के द्वारा सवारी को गार्ड आफ ऑनर दिया गया। सवारी के आगे घोडा, बेंड, पुलिस टुकड़ी तथा भजन मंडलियां चल रही थी।

यहां आपको बता दें कि सवारी परंपरागत मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाडी से होती हुई रामघाट पहुंची। जहां मां क्षिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर के लिए रवाना हुई।

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चलित रथ और सोशल मीडिया पर पहली बार सजीव प्रसारण

श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी का सजीव प्रसारण मंदिर प्रबंध समिति के फेसबुक पर व सवारी के दौरान चलित रथ में एल.ई.डी. के माध्यम से सवारी मार्ग में दर्शन हेतु खड़े श्रद्धालुओं को सजीव दर्शन की व्यवस्था की गई है। इस चलित रथ की विशेषता यह है कि, इसमें लाइव बॉक्स रखा गया, जिससे लाइव प्रसारण हुआ।

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