प्रदीप मालवीय, उज्जैन। Mahakal Bhasma Aarti: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सावन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि शनिवार तड़के ढाई बजे मंदिर के कपाट खोले गए। महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान का दिव्य श्रृंगार किया गया।

श्रावण मास का आज चौथा और अंतिम सोमवार होने के कारण आज सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों का ताँता लगा हुआ है । उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मन्दिर में दर्शन हेतु श्रद्धालु देर रात से ही कतार में लगी हुई है । रात्रि ढाई बजे मंदिर के पट खोले गए । इसके बाद तीन बजे बाबा महाकाल की भस्मारती शुरू हुई । जिसके हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लिए ।
श्रावण मास भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय माह माना गया है । मान्यता है की श्रावण माह में शिव आराधना करने से सभी कष्टों से तुरंत मुक्ति मिलती है। श्रावण माह के अंतिम सोमवार के दिन आज महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती की गई । भस्मारती के पहले बाबा को जल से स्नान महा पंचामृत अभिषेक किया गया जिसमे दूध ,दही ,घी ,शहद व फलो के रसो से अभिषेक हुआ। अभिषेक के बाद भांग और चन्दन से भोलेनाथ का आकर्षक श्रंगार किया गया और भगवान को वस्त्र धारण कराये गए। तत्पशचात बाबा को भस्म चढाई गई। भस्मिभूत होने के बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े व शंखनाद के साथ बाबा की भस्मार्ती की गई। भक्त आज के दिन का विशेष इंतजार करते हे इसलिए आज महाकाल के दरबार में सुबह से ही उत्साह और आनंद का माहोल है ।

श्रावण – भादो माह में सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी निकाले जाने की भी परंपरा हे। इसलिए आज शाम को बाबा की सवारी भी निकाली जाएगी । मान्यता है कि अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए सवारी के रूप में राजा महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हे। यहाँ बाबा की सवारी के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों के किनारे घंटो इंतज़ार करते हैं और महाकाल की एक झलक पा कर अपने आप को धन्य मानते है ।

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