प्रदीप मालवीय, उज्जैन। वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले भव्य सिंहस्थ महाकुंभ से पहले पवित्र मोक्षदायिनी मां शिप्रा नदी के लगातार हो रहे प्रदूषण को लेकर संत समाज का आक्रोश फूट पड़ा है। उज्जैन स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास के नेतृत्व में संतों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सीधे उज्जैन से देवास पहुंचा। संतों ने देवास के हवनखेड़ी गांव स्थित नागदहन नदी तथा आसपास की फैक्ट्रियों का औचक निरीक्षण किया। गौरतलब है कि यही नागदहन नदी आगे जाकर शिप्रा नदी में मिलती है जो इसके पानी को अत्यधिक जहरीला और प्रदूषित बना रही है।

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रात के अंधेरे में छोड़ा जा रहा फैक्ट्रियों का जहरीला केमिकल

निरीक्षण के बाद संतों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देवास की औद्योगिक इकाइयों द्वारा बिना ट्रीटमेंट किया गया जहरीला केमिकल युक्त पानी रात के अंधेरे में बेधड़क नदी में बहाया जा रहा है। संतों का कहना है कि यह प्रदूषित पानी इतना हानिकारक है कि इससे न केवल पवित्र नदी बल्कि आसपास के खेत, पशु-पक्षी और अन्य जीव-जंतु भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

संतों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार द्वारा खान नदी डायवर्शन परियोजना पर 918 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो नागदहन नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे? शिप्रा नदी में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु आचमन करते हैं और अब सिंहस्थ में महज दो साल का समय बचा है।

देवास कलेक्टर से मुलाकात कर दिया अल्टीमेटम

अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह से मुलाकात कर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया और पूरे प्रोजेक्ट की जानकारी ली। संतों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जहरीले पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो संत समाज भोपाल जाकर सीधे मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा और उग्र कदम उठाएगा।

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वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए देवास कलेक्टर ने संतों को आश्वस्त किया कि सिंहस्थ 2028 से पहले शिप्रा को पूर्ण रूप से स्वच्छ बनाने के लिए 1.5 करोड़ रुपये की विशेष योजना पर काम चल रहा है। इसके तहत प्रदूषित जल को एसटीपी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा, साथ ही ‘अमृत फेज-2’ के अंतर्गत सीवेज लाइन बिछाने का काम अगले साल जून-जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। निरीक्षण के दौरान संतों ने सन फार्मा के आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट का भी जायजा लिया।

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