केरल हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा है कि धरना, भूख हड़ताल और सत्याग्रह जैसी गतिविधियों की संवैधानिक लोकतंत्र में जगह नहीं है. शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी गतिविधियों में शामिल होने वाले छात्रों को निकाला जा सकता है. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें छात्रों को 4 नवंबर से शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने की इजाजत दी गई थी.

केरल हाईकोर्ट ने एक अहम ट‍िप्‍पणी में कहा है क‍ि कॉलेज-यूनिवर्सिटी आद‍ि श‍िक्षा संस्‍थान धरना-प्रदर्शन और राजनीति के ल‍िए नहीं हैं, पढ़ाई के ल‍िए हैं. 

हाईकोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान शिक्षा देने के लिए हैं, राजनीति करने के लिए नहीं. कॉलेज-यूनिवर्सिटी आदि में राजनीतिक गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है. केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार को श्री शंकराचार्य संस्कृत यूनिवर्सिटी के 16 सस्पेंडेड छात्रों को 4 नवंबर से शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने वाले सिंगल बेंच के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया.

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े इन छात्रों ने परीक्षा में बैठने की इजाजत देने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे उनका पूरा सेमेस्टर बर्बाद हो सकता है.

यूनिवर्सिटी में 13 अगस्त को सिंडिकेट की बैठक के दौरान SFI से जुड़े छात्रों ने प्रदर्शन किया था. वे कैंपस में बुनियादी सुविधाओं की कमी, पानी की समस्या और शिक्षकों के खाली पद भरने जैसी 18 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे.

वहीं, वाइस चांसलर ने आरोप लगाया कि सिंडिकेट बैठक के बाद कैंपस से निकलते समय 18 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रोका और धक्का दिया. उन्होंने बाल खींचने और उनकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया.

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