लखनऊ. उत्तर प्रदेश के 93 नगर निकायों में अब विकास प्राधिकरणों की तर्ज पर मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. इससे इन शहरों और कस्बों में जमीन के इस्तेमाल की योजना पहले से बनाई जा सकेगी. कहां मकान और दुकानें बनेंगी, कहां सड़कें होंगी और पार्क व जल निकासी के लिए कितनी जगह चाहिए, यह तय किया जाएगा. इसका उद्देश्य अनियोजित विकास को रोकना और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से सुविधाएं विकसित करना है.

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पहले चरण में 62 नगर पालिका परिषदें शामिल

योजना के पहले चरण में 62 नगर पालिका परिषदों का मास्टर प्लान बनाया जाएगा. इसके लिए एजेंसी चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. एजेंसी की फीस और मास्टर प्लान तैयार करने का खर्च केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना से उठाया जाएगा. नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद के मुताबिक, 50 हजार से एक लाख तक की आबादी वाले निकायों के लिए जल्द एजेंसी चुनी जाएगी.

जमीन के इस्तेमाल का तय होगा खाका

चुनी गई एजेंसी संबंधित निकायों में उपलब्ध जमीन, उसके मौजूदा इस्तेमाल, आबादी और सड़कों का आकलन करेगी. इसके आधार पर आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन तय की जाएगी. पार्क, सड़क, जल निकासी और दूसरी नागरिक सुविधाओं के लिए भी जगह का निर्धारण होगा. इससे भविष्य में बढ़ती आबादी के लिए बेहतर योजना बनाई जा सकेगी.

लोगों से मांगे जाएंगे सुझाव और आपत्तियां

मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की राय भी ली जाएगी. प्रस्तावित योजना पर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे. इसके बाद उनकी सुनवाई होगी. सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा. इससे स्थानीय जरूरतों को योजना में शामिल करने का मौका मिलेगा.

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अनियोजित विकास रोकने पर जोर

प्रदेश के कई नगर निकायों में आबादी बढ़ने के साथ आवासीय और व्यावसायिक निर्माण तेजी से हो रहे हैं. लेकिन कई जगह जमीन के इस्तेमाल की स्पष्ट योजना नहीं है. इससे आगे चलकर सड़क चौड़ी करने, नाली बनाने और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जगह की कमी हो सकती है. मास्टर प्लान के जरिए इन जरूरतों का पहले ही आकलन किया जाएगा. इससे विकास को व्यवस्थित करने और नागरिक सुविधाओं के लिए जमीन सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.