लखनऊ. उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर जारी है. राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार 12वें दिन बढ़ने से कई इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं. फैजुल्लागंज की गलियों में लोगों के गले तक पानी भरने की खबर है, जबकि वीआईपी इलाकों की सड़कें भी जलमग्न हो गई हैं. हजारों घरों और वाहनों पर बाढ़ का असर पड़ा है. उधर, गोंडा में घाघरा नदी उफान पर है और लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से मकानों और मंदिरों को नुकसान पहुंचा है.
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लखनऊ में सड़कें डूबीं, नावों से आवाजाही
लखनऊ में बाढ़ से तीन लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है. फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों में घरों के आसपास पानी भर गया है. सड़कों पर नावों से आवाजाही हो रही है और 50 से अधिक कारें पानी में डूब गई हैं. सुरक्षा के मद्देनजर गोमती रिवर फ्रंट को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है.
गोंडा के आठ गांवों में घुसा पानी
गोंडा में घाघरा नदी के उफान से आठ गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है. सात हजार से ज्यादा लोगों के बाढ़ में फंसे होने की जानकारी है. वहीं, लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से अब तक 13 घर और चार मंदिर नदी में समा चुके हैं. नदी किनारे बसे लोगों के सामने घर और संपत्ति बचाने की चुनौती है.
सीतापुर में खेतों में चार फीट पानी
सीतापुर के सकरन क्षेत्र में शारदा और बनबसा बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण फिर बाढ़ आ गई है. खेतों में चार फीट तक पानी भर गया है. किसान अपनी पकी धान की फसल बचाने के लिए पानी में उतरकर कटाई कर रहे हैं. कहीं खटिया डालकर तो कहीं पानी में खड़े होकर फसल काटने की मजबूरी है.
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अगले सप्ताह बारिश के आसार कम
मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, फिलहाल प्रदेश में कोई प्रभावी मौसम तंत्र सक्रिय नहीं है. अगले एक सप्ताह तक अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले 24 घंटे के दौरान कहीं-कहीं हल्की या छिटपुट बारिश हो सकती है. हालांकि, बारिश की संभावना कम होने के बावजूद नदियों और जलभराव वाले इलाकों में बाढ़ की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है.

