चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय ने UP NEET UG-2026 ऑनलाइन काउंसलिंग के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। अभ्यर्थियों को रजिस्ट्रेशन से लेकर सिक्योरिटी मनी तक सभी प्रक्रियाएं अपने ही बैंक खाते से पूरी करने की सलाह दी गई है।

सतीश सिंह, लखनऊ। अगर आप यूपी नीट यूजी-2026 के जरिए एमबीबीएस या बीडीएस में दाखिले की तैयारी कर रहे हैं तो काउंसलिंग शुरू होने से पहले कुछ अहम नियम जान लेना बेहद जरूरी है। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीएमई) ने ऑनलाइन काउंसलिंग के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। डीजीएमई ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे रजिस्ट्रेशन से लेकर सिक्योरिटी मनी जमा करने तक हर प्रक्रिया अपने नाम और अपने बैंक खाते से ही पूरी करें। छोटी-सी लापरवाही भी बाद में परेशानी का कारण बन सकती है।

डीजीएमई नेहा शर्मा के अनुसार, काउंसलिंग में केवल वही अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने नीट यूजी-2026 परीक्षा उत्तीर्ण की है। सभी उम्मीदवारों को विभागीय वेबसाइट upneet.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। काउंसलिंग से जुड़ी हर सूचना उसी मोबाइल नंबर और ई-मेल पर भेजी जाएगी, जो रजिस्ट्रेशन के समय दर्ज किए जाएंगे।

ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन

इस बार दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन होगी। अभ्यर्थियों को अपनी सुविधा के अनुसार एक नोडल सेंटर चुनना होगा और हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, डोमिसाइल तथा आरक्षण से जुड़े प्रमाण-पत्र ऑनलाइन अपलोड करने होंगे। इससे बार-बार दस्तावेज लेकर चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

फीस और सिक्योरिटी मनी

काउंसलिंग के लिए 2,000 रुपये का पंजीकरण शुल्क तय किया गया है, जो वापस नहीं होगा। इसके अलावा चॉइस फिलिंग से पहले सिक्योरिटी मनी जमा करना अनिवार्य होगा। सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के लिए 30 हजार रुपये, निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए 2 लाख रुपये और निजी डेंटल कॉलेजों के लिए 1 लाख रुपये सिक्योरिटी मनी निर्धारित की गई है। जो अभ्यर्थी सभी प्रकार की सीटों के लिए विकल्प भरना चाहते हैं, उन्हें 2 लाख रुपये जमा करने होंगे।

डीजीएमई ने स्पष्ट किया है कि सिक्योरिटी मनी स्वयं के बैंक खाते से ही जमा करें, क्योंकि काउंसलिंग पूरी होने के बाद धनराशि उसी खाते में वापस की जाएगी। यह राशि किसी भी स्थिति में कॉलेज की फीस में समायोजित नहीं होगी।

फ्री एग्जिट का विकल्प

अभ्यर्थियों को राहत देते हुए पहले चरण की काउंसलिंग में ‘फ्री एग्जिट’ का विकल्प भी दिया गया है। यानी यदि पहले राउंड में सीट आवंटित होने के बाद कोई अभ्यर्थी प्रवेश नहीं लेता है तो वह दूसरे और तीसरे चरण की काउंसलिंग में दोबारा भाग ले सकेगा।

आरक्षण से जुड़े नियम

आरक्षण से जुड़े नियमों को लेकर भी डीजीएमई ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है। ओबीसी और ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद जारी होना जरूरी होगा। उत्तर प्रदेश के बाहर के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को राज्य कोटे में सामान्य श्रेणी माना जाएगा।

महानिदेशालय ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे कॉलेजों की चॉइस अपनी वास्तविक प्राथमिकता के अनुसार भरें और अंतिम सबमिट करने से पहले उन्हें लॉक करना न भूलें, क्योंकि लॉक होने के बाद उसमें कोई बदलाव संभव नहीं होगा। डीजीएमई नेहा शर्मा का कहना है कि इस बार पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और अभ्यर्थी-केंद्रित बनाया गया है, ताकि दाखिले की प्रक्रिया बिना किसी अनावश्यक परेशानी के पूरी हो सके।